नीट का पेपर परीक्षा से पहले ही हो गया था लीक! CBI का कोर्ट में बड़ा खुलासा

नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई को अहम सबूत मिले हैं और कोर्ट ने तीन मुख्य आरोपियों से जेल में पूछताछ की इजाजत दे दी है। सभी 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 29 जून तक बढ़ाई गई है।

नीट यूजी 2026 परीक्षा में हुई गड़बड़ी और पेपर लीक की जांच कर रही सीबीआई के हाथ कुछ बेहद अहम और हैरान करने वाले सबूत लगे हैं। एजेंसी ने ये नए साक्ष्य दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट के सामने पेश किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सीबीआई को बड़ी राहत दी है, जिसके बाद इस प्रकरण से जुड़े कई प्रभावशाली चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद बढ़ गई है।

कोर्ट ने इस केस के मुख्य आरोपी शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे से तिहाड़ जेल के भीतर ही आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की विशेष अनुमति दे दी है। सीबीआई की टीम 17, 18 और 19 जून को जेल में इन तीनों से सवाल-जवाब करेगी। इसके साथ ही अदालत ने इस रैकेट में शामिल शुभम खैरनार समेत सभी 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 29 जून तक बढ़ा दी है।

सीबीआई के हाथ लगे नए और पुख्ता सबूत

पेपर लीक मामले की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। जांच के दौरान एजेंसी को कुछ ऐसे तकनीकी और दस्तावेजी प्रमाण मिले हैं जो परीक्षा की गोपनीयता भंग होने की ओर इशारा करते हैं। अदालत में अपनी दलीलें रखते हुए सीबीआई के वकीलों ने कहा कि उनके पास ऐसे नए सबूत हैं जो साबित करते हैं कि गिरफ्तार आरोपी परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले प्रश्नपत्र लीक करने और उन्हें चुनिंदा छात्रों के बीच बांटने के खेल में शामिल थे।

17 से 19 जून तक जेल में होगी पूछताछ

इन नए सुरागों के सामने आने के बाद आरोपियों से दोबारा पूछताछ करना जरूरी हो गया था। इसी आधार पर सीबीआई ने अदालत से कस्टडी में पूछताछ की मांग की थी। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मामले के मुख्य किरदारों शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे से जेल परिसर के अंदर ही 17, 18 और 19 जून को लंबी पूछताछ की अनुमति दे दी है। एजेंसी का मानना है कि इन तीनों से मिलने वाली जानकारी इस घोटाले के असली सरगना तक पहुंचने की आखिरी कड़ी साबित हो सकती है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत का रुख भी बेहद कड़ा नजर आया। शुरुआती तथ्यों और सबूतों को देखने के बाद कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि महज चंद पैसों के लालच में देश की इतनी प्रतिष्ठित और गोपनीय परीक्षा का पेपर लीक किया गया।

अदालत ने माना कि इसके पीछे एक-दो लोग नहीं, बल्कि पूरा संगठित गिरोह काम कर रहा था, जिसने लाखों उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।

नासिक, जयपुर से लेकर हरियाणा तक फैला था जाल

न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद जब आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया, तो पूरी कस्टडी हिस्ट्री भी सामने आई। सीबीआई ने इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए देशव्यापी छापेमारी की थी। मुख्य कड़ी शुभम खैरनार को महाराष्ट्र के नासिक से पकड़ा गया था, जबकि मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल जैसे बड़े चेहरों को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया गया। वहीं इस सिंडिकेट का एक और आरोपी यश यादव हरियाणा से दबोचा गया था। अब ये सभी 10 आरोपी 29 जून तक जेल की सलाखों के पीछे रहेंगे।

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