कहा जाता है कि अगर मन में कुछ सीखने और कर गुजरने की लगन हो, तो कामयाबी देर-सवेर कदम जरूर चूमती है। अंबाला शहर के निशांत कश्यप की जिंदगी इसी बात की जीती-जागती मिसाल है, जो आज अपनी कला से लोगों के दिलों में खास जगह बना चुके हैं।
एक दौर ऐसा भी था जब परिवार और समाज की नजर में डांस को महज एक शौक भर माना जाता था। मगर आज यही कला अनेक युवाओं के लिए करियर और पहचान का जरिया बन रही है। निशांत का सफर इसी बदलाव की प्रेरक कहानी है—कभी 300 रुपये महीने की नौकरी करने वाले निशांत अब न सिर्फ एक कामयाब डांस प्रशिक्षक हैं, बल्कि सैकड़ों बच्चों को मंच तक पहुंचाने का काम भी कर रहे हैं।
कैसे जागा डांस का जुनून
उनके संघर्ष और कामयाबी की यह कहानी बताती है कि जब इंसान के भीतर कुछ नया कर दिखाने का हौसला हो, तो हालात भी उसकी राह नहीं रोक पाते। 35 वर्षीय निशांत कश्यप ने बताया कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साल 2005 में आया। उस वक्त उनके बड़े भाई की शादी थी और समारोह में एक युवक के डांस को देखकर लोग जमकर तारीफ कर रहे थे। उसी दिन पहली बार उन्हें यह एहसास हुआ कि कला के जरिए भी लोगों के दिलों तक पहुंचा जा सकता है। बस यहीं से उनके भीतर डांस सीखने की चाहत ने जन्म लिया और उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया।
छत पर घंटों चलता रोजाना का अभ्यास
निशांत ने बताया कि उस पल के बाद वे बाजार से गानों की कैसेट खरीदकर लाते और घर की पुरानी छत पर रोजाना घंटों रियाज किया करते थे। माइकल जैक्सन और प्रभु देवा उनके पसंदीदा कलाकार थे, और उन्हीं को देखकर वे नए-नए स्टेप्स सीखने की कोशिश करते। लगातार अभ्यास की वजह से एक समय घर की छत तक क्षतिग्रस्त हो गई। जब इसकी जानकारी उनके पिता को हुई तो उन्हें खूब डांट सुननी पड़ी। परिवार का मानना था कि डांस में कोई भविष्य नहीं है, फिर भी निशांत ने अपने सपने से मुंह मोड़ने से साफ इनकार कर दिया।
नौकरी के साथ निखारता रहा हुनर
निशांत बताते हैं कि घर की आर्थिक हालत मजबूत न होने के कारण उन्हें कम उम्र में ही काम शुरू करना पड़ा। पहले एक ज्वेलर्स की दुकान पर 300 रुपये महीने की नौकरी की और बाद में कपड़ा बाजार की एक दुकान पर काम करने लगे। काम के साथ-साथ डांस की दीवानगी भी बनी रही। उन्होंने बताया कि सुबह पांच बजे दोस्तों के साथ पार्क में अभ्यास करना और फिर दिनभर काम पर जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था।
शोरूम में मिली पहली पहचान
निशांत के मुताबिक उनकी जिंदगी का एक अहम मोड़ तब आया, जब एक कपड़ा शोरूम में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पहली बार सार्वजनिक मंच पर डांस करने का मौका मिला। उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं और शोरूम मालिक ने पुरस्कार राशि देकर उन्हें सम्मानित किया। यह सम्मान उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था और यहीं से उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। धीरे-धीरे उन्होंने पंजाबी, हरियाणवी और वेस्टर्न डांस समेत कई शैलियों में महारत हासिल कर ली। इसी बीच पार्क में अभ्यास के दौरान कुछ फैक्ट्री के युवाओं ने उनसे डांस सीखने की इच्छा जताई। शुरुआत में उन्हें खुद पर भरोसा नहीं था कि वे किसी को सिखा पाएंगे, लेकिन समय के साथ उन्होंने बच्चों को प्रशिक्षण देना शुरू किया और यहीं से उनकी पहली कमाई की शुरुआत हुई।
यूं बने 'अंबाला के रितिक रोशन'
उन्होंने बताया कि जगाधरी गेट स्थित एक डांस अकादमी में उनकी मुलाकात डांस प्रशिक्षक रूबी सर से हुई, जिन्होंने उन्हें विभिन्न स्कूलों और कार्यक्रमों में अवसर दिलवाए। इसके बाद उन्होंने हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में बच्चों को प्रशिक्षण दिया और प्रतियोगिताओं में भाग दिलवाया। रितिक रोशन के डांस स्टाइल की उनकी बेहतरीन प्रस्तुति के चलते लोग उन्हें 'अंबाला का रितिक रोशन' कहने लगे। निशांत के अनुसार आज वे कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर चुके हैं, वहीं उनके प्रशिक्षित बच्चे भी अलग-अलग मंचों पर पदक जीतकर अंबाला का नाम रोशन कर रहे हैं।
स्कूलों में दे रहे डांस की शिक्षा
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में वे एक स्कूल में डांस शिक्षक हैं और अपनी डांस अकादमी के जरिए भी बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। निशांत सिर्फ डांसर ही नहीं, बल्कि एक मिमिक्री कलाकार भी हैं। वे रितिक रोशन, सनी देओल, अमिताभ बच्चन और कई नेताओं की आवाज की हूबहू नकल कर लेते हैं। उनका मानना है कि हर युवा के भीतर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है, बस जरूरत उसे पहचानने और मेहनत के साथ आगे बढ़ाने की है। निशांत कहते हैं कि उनका संघर्ष आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
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