असम में हुए विमान हादसे ने जहानाबाद के एक परिवार से उसका बेटा छीन लिया। हुलासगंज के बनवरिया गांव के रहने वाले भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम अब कभी अपने घर नहीं लौटेंगे। जिस बेटे की शादी की तैयारियां चल रही थीं, उसका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा तो हर आंख नम हो गई।
शहीद शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया, ‘न्यूज से मालूम चला कि भारतीय वायुसेना का प्लेन क्रैश कर गया है। कुछ देर तक तो समझ ही नहीं आया कि हमारे ही बच्चे का विमान हादसे का शिकार हुआ है। समाचार से पता चला कि यह दुर्घटना असम में हुई है, तो हम बिना देर किए वहां के लिए रवाना हो गए। वहां पहुंचने पर पता चला कि मौसम की वजह से हमारे बेटे की जान चली गई।’
पूरे गांव की आंखें हुईं नम
असम विमान हादसे में वीरगति को प्राप्त हुए शुभम का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव हुलासगंज स्थित बनवरिया पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें भर आईं। लोगों ने वह दृश्य देखा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना तक नहीं की थी। परिवार में पिता अमरेंद्र शर्मा उर्फ पप्पू शर्मा, मां पूनम देवी और छोटे भाई सत्यम का रो-रोकर बुरा हाल था।
नवंबर में होनी थी शादी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार ने 5 साल पहले वायुसेना ज्वाइन की थी। आने वाले नवंबर में उनकी शादी होनी थी। महज एक माह पहले ही वे अपनी दादी के श्राद्ध कर्म में शामिल होने गांव आए थे और यहां से 10 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। इसी बीच उनके शहीद होने की खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया।
कैसे मिली हादसे की सूचना
शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा उर्फ पप्पू शर्मा ने बताया, ‘दोपहर 1 बजे न्यूज से मालूम चला कि भारतीय वायुसेना का AI 32 विमान क्रैश हुआ है। थोड़ी देर बाद यह सूचना मिली कि हादसे का शिकार हमारे ही बच्चे का विमान हुआ है। यह सुनते ही दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। हम बिना समय गंवाए उस स्थान के लिए निकल पड़े। वहां जो देखा, उस दृश्य ने भीतर तक हिला दिया। हम अपने बच्चे का चेहरा तक नहीं देख पाए। बस इतना दिखा कि विमान दो हिस्सों में बंट चुका था और हरे पर्दे से घिरा हुआ था। विमान को नजदीक से देखा, लेकिन बेटे का चेहरा नहीं देख सके।’
आखिरी बातचीत में मां से क्या कहा
पिता आगे बताते हैं कि बेटे से उनकी आखिरी बातचीत सुबह उस वक्त हुई थी, जब उसकी फ्लाइट टेक ऑफ करने जा रही थी। शुभम ने 2 मिनट के लिए मां को कॉल किया और कहा – ‘मां, मैं मिशन पर टेकऑफ कर रहा हूं। लौटकर आऊंगा तो बात करूंगा।’ परिवार से भी उसकी बातचीत 2 मिनट की ही हुई और स्वजनों ने ‘दही-मछली’ कहकर बेटे को उड़ान के लिए शुभकामनाएं दीं।
परिजनों के अनुसार सुबह करीब साढ़े 7 बजे उसकी फ्लाइट ने टेक ऑफ किया और 10:30 बजे के आसपास कैंपस में लैंडिंग के दौरान हादसा हुआ। खराब मौसम के कारण ही बेटे की फ्लाइट क्रैश हुई।
आखिरी बार कब आए थे घर
शुभम के पिता ने बताया कि उनका बेटा 5 मई को ममेरी बहन की शादी में घर आया था। उसे छुट्टी नहीं मिल रही थी, लेकिन परिवार ने जब उसके उच्च अधिकारी से बात की, तब उसे अवकाश दिया गया। शादी के दौरान ही उसकी दादी की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें गयाजी ले जाना पड़ा। हालांकि दादी का निधन हो गया और श्राद्ध कर्म के बाद शुभम काम पर लौटा था। वह 26 मई को ड्यूटी पर लौटा था और 13 जून को यह हादसा हो गया।
बहुत कष्ट से पढ़ाया-लिखाया
अमरेंद्र शर्मा कहते हैं कि उन्होंने अपने बेटे को बहुत कष्ट से पढ़ाया-लिखाया। शुभम शुरू से ही मेहनती था और जिस तरह की मेहनत उसने की, उसी हिसाब से उसे परिणाम भी मिला। मगर दुर्भाग्य कि वह अब इस दुनिया में नहीं है। इस हादसे से शुभम के परिवार के साथ-साथ पूरे गांव की आंखें नम हैं और हर कोई नियति के इस फैसले पर अब तक यकीन नहीं कर पा रहा।
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