आईटी की चमक के बीच चार सदियों से अटल आस्था का केंद्र — रंगनाथ स्वामी मंदिर की अनोखी दास्तान

हैदराबाद के नानकरामगुडा और फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट की आधुनिक चकाचौंध के ठीक बीच खड़ा लगभग 400 साल पुराना श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर आज भी अपनी भव्यता बनाए हुए है। कुतुब शाही काल का यह मंदिर तकनीक की दुनिया के बीच शांति और इतिहास का प्रतीक बन गया है।

गगनचुंबी इमारतें, कांच से बने चमचमाते कॉर्पोरेट दफ्तर, दिन-रात दौड़ती गाड़ियाँ और चौड़ी सड़कें — आज के हैदराबाद के नानकरामगुडा और फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट की यही पहचान है। यह इलाका भारत के आधुनिक आईटी और आर्थिक विकास के वैश्विक चेहरे के रूप में उभरा है। लेकिन इसी कंक्रीट के जंगल और आधुनिकता की रौनक के ठीक बीच एक ऐसा शांत और ऐतिहासिक कोना भी मौजूद है, जहाँ कदम रखते ही वक्त मानो ठहर जाता है।

यहाँ सदियों पुराना इतिहास और नई दुनिया की प्रगति एक साथ साँस लेते दिखाई देते हैं। हम बात कर रहे हैं नानकरामगुडा में स्थित ऐतिहासिक श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर की।

कुतुब शाही काल का प्राचीन मंदिर

लगभग चार सदी पुराना यह मंदिर कुतुब शाही काल का माना जाता है। एक ओर इस क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विशाल कैंपस और आईटी पार्क फैले हुए हैं, तो दूसरी ओर पत्थरों को तराशकर बनाया गया यह प्राचीन मंदिर अपनी पूरी भव्यता के साथ आज भी सीना ताने खड़ा है।

शोर के बीच ठहरी हुई शांति

ऊँचे-ऊँचे कॉर्पोरेट टावरों की छाया में बसे इस मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही शहर का सारा शोर-शराबा पूरी तरह थम जाता है। इसकी प्राचीन बनावट, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और परिसर में लगे विशाल पुराने पेड़ यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को एक अलग ही सुकून का अहसास कराते हैं। वास्तुकला, कला और संस्कृति का यह बेजोड़ नमूना सभी को अपनी ओर खींचता है।

फिल्मकारों का पसंदीदा ठिकाना

अपनी इसी अनूठी और पारंपरिक खूबसूरती के कारण यह परिसर लंबे समय से दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माताओं की भी पहली पसंद रहा है। यहाँ कई सुपरहिट फिल्मों के महत्वपूर्ण दृश्य फिल्माए जा चुके हैं।

टेक-प्रोफेशनल्स के लिए आध्यात्मिक सहारा

आज के दौर में जब लोग काम के दबाव और शहरी भागदौड़ के बीच मानसिक शांति की तलाश में रहते हैं, तब फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट का यह मंदिर एक आदर्श आध्यात्मिक केंद्र के रूप में सामने आता है। खासकर इस इलाके में काम करने वाले टेक-प्रोफेशनल्स के लिए यह प्राचीन धरोहर दिनभर की थकान और तनाव को दूर करने का एक मुख्य माध्यम बन चुकी है।

आधुनिक विकास के बीच इस 400 साल पुरानी विरासत का सुरक्षित बने रहना यह याद दिलाता है कि प्रगति की दौड़ में अपनी जड़ों को थामे रखना कितना जरूरी है।

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