बीकानेर के लो-कॉस्ट पॉलीहाउस का कमाल: 45 डिग्री गर्मी में भी खीरे की रिकॉर्ड पैदावार, खर्च भी न्यूनतम

बीकानेर कृषि विश्वविद्यालय के छोटे आकार वाले कम लागत पॉलीहाउस में 45 डिग्री से अधिक तापमान के बावजूद खीरे की शानदार उपज मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर अपनाने पर यह मॉडल किसानों की आय बढ़ा सकता है।

पश्चिमी राजस्थान के सूखे और गर्म इलाकों में संरक्षित खेती को आगे बढ़ाने की दिशा में बीकानेर कृषि विश्वविद्यालय का एक नया प्रयोग कारगर साबित हुआ है। विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किए गए छोटे आकार के पॉलीहाउस में खीरे की बेहद अच्छी पैदावार दर्ज की गई है, जो शुष्क क्षेत्र के किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।

संरचना में इस्तेमाल हुई तकनीकें

इस खास तौर पर तैयार की गई संरचना में डबल नेट, ड्रिप इरिगेशन और इंसेक्ट-प्रूफ नेट जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इन्हीं तकनीकों के संयोजन ने प्रतिकूल मौसम में भी फसल को सुरक्षित रखते हुए बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया।

भीषण गर्मी में भी बेहतरीन प्रदर्शन

उल्लेखनीय बात यह रही कि 45 डिग्री से अधिक तापमान के बावजूद इस पॉलीहाउस में लगी फसल ने शानदार प्रदर्शन किया। आमतौर पर इतनी तेज गर्मी में सामान्य खेती में फसल को नुकसान की आशंका रहती है, लेकिन इस मॉडल ने उन परिस्थितियों में भी अच्छी उपज देकर अपनी उपयोगिता साबित की।

किसानों की आय बढ़ाने की संभावना

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर सकेंगे। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है, खासकर उन इलाकों में जहां पानी की कमी और अत्यधिक तापमान खेती के लिए बड़ी चुनौती बने रहते हैं।

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