तीन वर्षीय बच्ची को बिस्किट का लालच देकर बहलाया, फिर हैवानियत की हदें पार; अस्पताल में तोड़ा दम

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में तीन साल की मासूम के साथ कथित यौन हिंसा और उसकी मौत ने पूरे राज्य को हिला दिया है। पुलिस ने बिहार के एक प्रवासी मजदूर को गिरफ्तार किया है।

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में तीन साल की एक बच्ची के साथ हुई कथित यौन हिंसा और उसके बाद हुई मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। गुम्मिडीपुंडी के औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले एक प्रवासी परिवार की इस मासूम को गंभीर हालत में झाड़ियों से बरामद किया गया था। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने बिहार के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर को गिरफ्तार किया है।

परिचित होने का उठाया फायदा

शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी और बच्ची का परिवार एक-दूसरे से परिचित थे। इसी जान-पहचान का लाभ उठाकर आरोपी ने बच्ची को बिस्किट का लालच दिया और उसे अपने साथ ले गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना वाले दिन बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी और कुछ देर बाद अचानक लापता हो गई।

झाड़ियों में घायल मिली मासूम

तलाश के दौरान इलाके की एक महिला ने झाड़ियों के बीच बच्ची को गंभीर रूप से घायल हालत में देखा। उसने तुरंत आसपास के लोगों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

इलाके में फैला आक्रोश

स्थानीय लोगों के मुताबिक, आरोपी को घटना के बाद पकड़ लिया गया और गुस्साई भीड़ ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। वारदात की खबर फैलते ही पूरे इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला। कुछ अन्य लोगों पर भी शक जताया गया और उनके साथ मारपीट की घटनाएं सामने आईं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में सिर्फ एक ही आरोपी की भूमिका सामने आई है और यह सामूहिक अपराध का मामला नहीं है।

पॉक्सो के साथ जुड़ रही हत्या की धाराएं

पुलिस ने पहले आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। अब बच्ची की मौत के बाद हत्या समेत अन्य गंभीर धाराएं भी इसमें जोड़ी जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच तेज गति से चल रही है और जल्द ही आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाएगा।

कानून-व्यवस्था पर फिर सवाल

यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था और अब एक बार फिर सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले पर डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सरकार को और सख्त रुख अपनाने की जरूरत है तथा अपराधियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। इसे सामाजिक समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

‘सिंगप्पेन’ सुरक्षा बल पर उठे सवाल

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सत्ता संभालने के बाद महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा बल ‘सिंगप्पेन’ बनाने की घोषणा की थी। कुछ ही दिन पहले इस पहल को औपचारिक रूप से शुरू किया गया था। लेकिन इस ताजा घटना ने सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

आंकड़ों में बच्चों के खिलाफ अपराध

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में देशभर में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1.77 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 67 हजार से ज्यादा मामले पॉक्सो कानून के तहत दर्ज हुए थे। तिरुवल्लूर की यह घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और ऐसे मामलों में त्वरित न्याय की आवश्यकता को लेकर गंभीर बहस का विषय बन गई है।

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