पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों पर हुई दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ हजारों की संख्या में ब्रिटिश कश्मीरी लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर जुटे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पीओके में पाकिस्तानी सेना लगातार मानवाधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
नागरिकों की मौत और महिलाओं से दुर्व्यवहार के आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पीओके में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई नागरिकों की जान गई है, कई लोग घायल हुए हैं और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई।
आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने रविवार को रावलाकोट ईदगाह में चल रहे एक धरने पर सीधी गोलीबारी की, जिसमें दो नागरिकों की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए। इसी तरह की कार्रवाइयों के बाद यह जन-सैलाब सड़कों पर उतरा।
न्याय और स्वतंत्र जांच की मांग
ब्रिटेन में लाखों लोगों ने हाथों में तख्तियां थामकर इन घटनाओं के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से पीओके के हालात की जांच कराने की अपील की।
रैली में मौजूद वक्ताओं ने बताया कि पीओके के लोग सस्ती बिजली, आर्थिक राहत, बेहतर शासन और सरकार के वादों को पूरा करने जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इन प्रदर्शनों के जवाब में सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया, जिसमें कई लोग घायल हुए और कुछ की जान चली गई।
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी रेंजर्स और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई की निंदा करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। उनका कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य पीओके के लोगों की समस्याओं को दुनिया के सामने लाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।
हफ्तों से जारी अशांति
पीओके में पिछले कई हफ्तों से अशांति बनी हुई है। लोग बढ़ती महंगाई, बिजली बिल और जरूरी सामान की कमी को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आर्थिक संकट और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
प्रदर्शनों को रोकने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने अर्धसैनिक बलों को तैनात किया, जिसके बाद कई स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं। इन घटनाओं में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबरें हैं। प्रदर्शनकारियों को भारी नुकसान उठाने की चेतावनी भी दी गई है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस आंदोलन को राजद्रोह की शुरुआत करार दिया है। वहीं अधिकारियों ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
एमक्यूएम के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने पीओके में बल प्रयोग तुरंत बंद करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रही, तो इसका असर पाकिस्तान की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। लंदन में हुआ यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
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