तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर पार्टी के बागी गुट के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संगठन में सलाहकार की भूमिका सौंपे जाने की पुरजोर वकालत भी की। यह गुट इस समय तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल पर नियंत्रण पाने की कोशिश में जुटा है।
22 तक पहुंच सकती है बागी गुट की ताकत
बागी खेमे का दावा है कि पार्टी के दो और सांसद जल्द ही उसके साथ आने वाले हैं। ऐसा होने पर लोकसभा में इस गुट की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद से ही पार्टी के भीतर हलचल तेज है। बागी सांसद अब एक अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता पाने के लिए सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं।
दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं सुदीप
बंद्योपाध्याय तृणमूल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ सांसदों में गिने जाते हैं और वर्षों से दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वह 2011 से 2025 तक लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता रहे, हालांकि बाद में इस पद पर अभिषेक बनर्जी की नियुक्ति हो गई।
एक बांग्ला समाचार चैनल से बातचीत में बंद्योपाध्याय ने बताया कि कई सांसदों और विधायकों के संपर्क करने के बाद उन्होंने बागी गुट का साथ देने का निर्णय लिया। ये सभी चाहते हैं कि ममता बनर्जी संगठन के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं।
“ज्यादातर सांसद और विधायक चाहते हैं कि पार्टी बनी रहे। यह उनकी अपनी पहल है। वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार के रूप में बनी रहें और नेता जैसी भूमिका निभाती रहें। उनकी इस अपील ने मेरा दिल छू लिया, इसलिए मैंने तय किया कि मैं उनके साथ जा सकता हूं।”
याचिका पर अब तक नहीं किए हस्ताक्षर
बागी गुट में शामिल होने के बावजूद बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अब तक उस याचिका पर दस्तखत नहीं किए हैं, जिसे बागी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सौंपने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से व्यक्तिगत रूप से मिलने के बाद ही ऐसा करेंगे।
“कल दोपहर तक सुवेंदु ने कहा था कि शायद वह न आ पाएं और मुझे दस्तखत कर देने चाहिए। मैंने उनसे साफ कह दिया कि मैं तभी हस्ताक्षर करूंगा, जब वह खुद आएंगे। हो सकता है कि हम आज रात मिलें।”
व्यक्तिगत मुलाकात पर उनके इस जोर से बंद्योपाध्याय के अगले कदम को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।
नेतृत्व की भूमिका से इनकार
नेतृत्व संभालने को लेकर बढ़ते दबाव पर बंद्योपाध्याय ने कहा, “मुझ पर नेतृत्व की भूमिका संभालने का दबाव रहा है, लेकिन इस पूरी कवायद के पीछे हमेशा काकोली घोष ही रही हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल नेतृत्व की कमान संभालने की उनकी कोई मंशा नहीं है, हालांकि कुछ सांसद उन्हें इसके लिए मनाने की कोशिश में लगे हैं।
अमित शाह से एक घंटे से ज्यादा चली बातचीत
इससे एक दिन पहले बंद्योपाध्याय ने बागी सांसद शताब्दी रॉय के साथ दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर उनसे मुलाकात की थी, जिसके बाद उनके सियासी भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। शनिवार रात वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले।
इस मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इसे महज औपचारिक शिष्टाचार भेंट से कहीं बढ़कर बताया। बंद्योपाध्याय ने कहा, “शुरू में बैठक के सात मिनट तक चलने की उम्मीद थी, लेकिन यह एक घंटे से ज्यादा समय तक चली और करीब 60 मिनट की बातचीत के बाद चाय परोसी गई।” इसके अलावा रविवार को वह यादव के आवास पर हुई रणनीतिक बैठक में भी शामिल हुए।
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