पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बिगड़े मौसम ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बीते 24 घंटों में तेज हवाओं, बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश के चलते सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 33 अन्य लोग घायल हुए हैं। हालात तब और गंभीर माने जा रहे हैं जब मौसम को लेकर पहले से चेतावनियां जारी की जा चुकी थीं, फिर भी जमीनी स्तर पर पर्याप्त तैयारी न होने के कारण यह बड़ा हादसा हुआ।
मृतकों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल
पाकिस्तानी समाचार चैनल की रिपोर्ट के अनुसार प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनमें बताया गया है कि सबसे अधिक नुकसान बन्नू, शांगला और मानसेहरा जिलों में हुआ है। जान गंवाने वालों में चार पुरुष, एक महिला और दो बच्चे शामिल हैं। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई घरों की दीवारें और छतें ढह गईं, जिनकी चपेट में आकर लोगों की मौत हुई।
आगे और बारिश की चेतावनी
पाकिस्तान मौसम विभाग ने आगाह किया है कि रविवार को ऊपरी खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के कई इलाकों में और बारिश हो सकती है। हालांकि देश के शेष हिस्सों में मौसम गर्म और शुष्क बने रहने की संभावना जताई गई है।
पहले से जारी था तबाही का अलर्ट
पिछले सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इस तरह के तूफान और बारिश का पूर्वानुमान पहले ही लगा लिया गया था। इसके बावजूद हुआ नुकसान यह साफ दर्शाता है कि चेतावनियों और जमीनी तैयारियों के बीच आज भी एक बड़ा फासला बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने आंधी और बारिश को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था। 12 से 17 अप्रैल के बीच पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, पीओके और पीओजीबी के लिए चेतावनी दी गई थी। जिला स्तर तक यह अलर्ट भेजा गया था, फिर भी बड़ा नुकसान होने से रोका नहीं जा सका।
प्रशासन को मिला था तैयारी का पूरा मौका
चित्राल और स्वात जैसे संवेदनशील इलाकों के साथ-साथ लाहौर और रावलपिंडी जैसे घनी आबादी वाले शहरों की पहचान भी पहले ही कर ली गई थी। मौसम विभाग ने तेज बारिश, तेज हवाओं और संभावित खतरों की जानकारी भी समय रहते दी थी, ताकि प्रशासन पहले से इंतजाम कर सके और नुकसान को कम किया जा सके।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आज भी मौसमी आपदाओं से निपटने में बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। मौसम संबंधी पूर्वानुमान पहले से कहीं अधिक सटीक हो चुके हैं और इसके लिए सरकारी संस्थाएं भी मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारी और त्वरित कार्रवाई में अब भी स्पष्ट कमी नजर आती है।
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