उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद, जिसे सुहाग नगरी के नाम से जाना जाता है, अपने कांच और चूड़ियों के विशाल कारोबार के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। इस चमचमाते उद्योग की रौनक के पीछे एक कड़वी हकीकत भी छिपी है, जहां सैकड़ों दिहाड़ी मजदूर हर सुबह रोजगार की तलाश में शहर के चौराहों पर भटकने को विवश रहते हैं।
मजदूरों के दर्द से जन्मी पहल
इन्हीं बेसहारा श्रमिकों की पीड़ा को करीब से महसूस करते हुए शहर के एक संवेदनशील कांच उद्योगपति ने एक प्रेरक और अनूठी शुरुआत की है। उनका मकसद इन मजदूरों को मजबूरी से निकालकर मजबूती की ओर ले जाना है, ताकि उन्हें रोज-रोज काम के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
मुफ्त में बनेंगे हैंडीक्राफ्ट कारीगर
इस पहल के तहत काम की तलाश में इधर-उधर घूमने वाले दिहाड़ी मजदूरों को निशुल्क हैंडीक्राफ्ट कारीगर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। हुनरमंद बनने के बाद ये मजदूर आत्मनिर्भर बन सकेंगे और उनके जीवन में खुशहाली की नई राह खुलेगी।
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