प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संभावित मुलाकात से पहले घरेलू राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने रविवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भारत को कम से कम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर की यात्रा को स्थगित कर देना चाहिए। पार्टी का कहना है कि कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र ‘बुली’ करने वालों के सामने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए केवल फोन कॉल और प्रेस वक्तव्यों से कहीं अधिक प्रयास करता है।
नाविकों की मौत और ‘धमकी भरी भाषा’ पर सवाल
विपक्षी दल ने सवाल खड़ा किया है कि क्या प्रधानमंत्री इस मुलाकात में ओमान तट के निकट एक जहाज पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की कड़ी निंदा का मुद्दा उठाएंगे। साथ ही पार्टी ने पूछा है कि क्या 12 जून को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा इस्तेमाल की गई ‘धमकी भरी और अस्वीकार्य भाषा’ को भी बैठक में उठाया जाएगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही अपने स्वयं-घोषित अच्छे मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने वाले हैं। उन्होंने लिखा, “सभी भारतीय नागरिकों के मन में सबसे प्रमुख सवाल यह है कि (1) क्या प्रधानमंत्री मोदी ओमान तट के निकट एक जहाज पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत को लेकर भारत की ओर से कड़ी निंदा का मुद्दा उठायेंगे; और (2) 12 जून, 2026 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा इस्तेमाल की गई धमकी भरी और अस्वीकार्य भाषा का मुद्दा उठाएंगे।”
व्यापार समझौते पर तीखा हमला
रमेश ने याद दिलाया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर भी जल्द ही भारत आने वाले हैं, ताकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि ‘पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार को लेकर अंतरिम समझौते की रूपरेखा’ की घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप ने तीन फरवरी, 2026 की रात को की थी।
कांग्रेस नेता के अनुसार, ट्रंप ने उस समय कहा था कि यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी के विशेष अनुरोध पर की गई, जब प्रधानमंत्री संसद में राहुल गांधी द्वारा चीन को लेकर उनकी ‘कायरता’ के खुलासे के दबाव में थे। रमेश ने आरोप लगाया, “यह ‘डील’ भारत के लिए एकतरफा नुकसान वाला सौदा था, जिसमें मोदी सरकार ने भारी एकतरफा रियायतें दीं, जो हमारे किसानों और उद्योगों के लिए खतरा हैं।”
मलेशिया का उदाहरण और 500 अरब डॉलर का मुद्दा
रमेश ने मलेशिया जैसे देशों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा इन समझौतों की पृष्ठभूमि बने ट्रंप-टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद इन देशों ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौतों को ‘अमान्य’ घोषित कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार न केवल इस समझौते को छोड़ने में नाकाम रही, जो भारत के करोड़ों किसानों के भविष्य को खतरे में डालता है, बल्कि उस समय भी चुप और असहाय बनी रही जब रुबियो ने घोषणा की कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका से भारत के वार्षिक आयात को प्रभावी रूप से दोगुना कर देगा। रमेश ने कहा, “रुबियो-जयशंकर बातचीत, राष्ट्रपति ट्रंप की शुल्क व्यवस्था को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा पलटे जाने और इस व्यापार समझौते की साफ अन्यायपूर्ण प्रकृति को देखते हुए, भारत को कम से कम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की यात्रा स्थगित करनी चाहिए।” उन्होंने जोड़ा, “कोई भी स्वाभिमानी देश ‘बुली’ करने वालों के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए केवल फोन कॉल और प्रेस वक्तव्यों से कहीं अधिक प्रयास करेगा।”
जी-7 बैठक से इतर होगी मुलाकात
अमेरिकी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ट्रंप बुधवार को फ्रांस में जी-7 बैठक से इतर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। पिछले साल फरवरी में वॉशिंगटन में हुई भेंट के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात होगी। यह बैठक होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना द्वारा निशाना बनाए गए वाणिज्यिक जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की मौत से उपजी चिंताओं के बीच हो रही है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और वॉशिंगटन द्वारा नई दिल्ली पर भारी शुल्क लगाने के फैसले के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में आई खटास के बीच ट्रंप और मोदी के बीच यह पहली आमने-सामने की बातचीत होगी। दोनों नेताओं के बीच कुछ अवसरों पर फोन पर बातचीत हुई है और फरवरी में उन्होंने एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते के प्रारूप पर सहमति जताई थी, जिस पर बातचीत अब भी जारी है।
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