गांवों की सरकार में दौड़ेगा AI, IIT कानपुर ने पंचायतों के लिए बनाया हाईटेक मॉडल, दिया जा रहा प्रशिक्षण

IIT कानपुर ने पंचायतों के कामकाज को बदलने वाला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत प्रदेश भर से बुलाए गए 250 प्रतिनिधियों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की पंचायतों को डिजिटल और स्मार्ट बनाने की दिशा में IIT कानपुर ने एक बड़ी पहल की है। संस्थान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो गांवों की सरकार के कामकाज का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इस मॉडल के सहारे पंचायतों के प्रशासनिक कार्य, योजनाओं का क्रियान्वयन, रिकॉर्ड प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बन सकेगी।

इस पहल की नींव पंचायती राज विभाग और IIT कानपुर के बीच हुए एक अहम करार से पड़ी। समझौते के तहत प्रदेश के सभी जिलों से पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े 250 प्रतिनिधियों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए IIT कानपुर बुलाया गया। इनमें जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और पंचायत सचिव समेत अलग-अलग स्तरों के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

IIT परिसर में आयोजित हुआ आवासीय प्रशिक्षण शिविर

प्रतिभागियों के लिए IIT कानपुर परिसर में आवासीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया, जहां उन्हें आधुनिक तकनीकों, डिजिटल प्रशासन और नेतृत्व क्षमता के विकास से जुड़ी जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण का मकसद केवल तकनीक की समझ देना नहीं था, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों को बेहतर प्रबंधन और असरदार नेतृत्व के लिए तैयार करना भी रहा।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने पंचायतों में डिजिटल टूल्स, डेटा प्रबंधन, समस्याओं के समाधान और योजनाओं की निगरानी में AI की संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत की। प्रतिभागियों ने इस कदम को भविष्य की पंचायत व्यवस्था के लिए बेहद उपयोगी बताया।

AI से बदलेगा पंचायतों के काम करने का अंदाज

IIT कानपुर के वरिष्ठ प्रोफेसर विमल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज दुनिया भर में शोध, प्रशासन और उद्योगों का अहम हिस्सा बन चुका है और अब यही तकनीक ग्रामीण प्रशासन में भी नई क्रांति ला सकती है। उन्होंने कहा कि पंचायतों के कामकाज में AI के इस्तेमाल से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और आम नागरिकों तक सेवाएं ज्यादा पारदर्शी ढंग से पहुंच सकेंगी।

प्रोफेसर विमल के मुताबिक पंचायत प्रतिनिधियों को सिर्फ तकनीकी जानकारी देना काफी नहीं है, बल्कि यह समझाना भी जरूरी है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों को असरदार तरीके से कैसे निभाया जाए। इसी सोच के साथ प्रशिक्षण में नेतृत्व, प्रबंधन और जमीनी स्तर पर योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर खास जोर दिया गया।

गांवों तक पहुंचेगी तकनीकी क्रांति

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर AI आधारित व्यवस्थाएं ठीक ढंग से लागू होती हैं तो ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी, शिकायतों के निस्तारण, संसाधनों के प्रबंधन और विकास कार्यों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दिखेगा। इससे न सिर्फ पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण जनता को भी बेहतर और समय पर सेवाएं मिल सकेंगी।

IIT कानपुर की इस पहल को प्रदेश की पंचायतों को पारंपरिक व्यवस्था से बाहर निकालकर तकनीक आधारित प्रशासन की ओर ले जाने वाला अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल उत्तर प्रदेश के गांवों में सुशासन और डिजिटल बदलाव का नया अध्याय लिख सकता है।

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