संघर्ष, हौसले और कामयाबी की जीती-जागती मिसाल बनी रीवा की बेटी कल्पना प्रजापति ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट का पद हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है। बेहद विषम हालात में पली-बढ़ी कल्पना अब रेलवे में ट्रेन संचालन से जुड़ी अहम जिम्मेदारी संभालेंगी।
रीवा जिले के बहुरीबांध गांव की रहने वाली 23 वर्षीय कल्पना उन तमाम आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो घर की तंगहाली के आगे अक्सर अपने सपनों से समझौता कर बैठते हैं।
जन्म के साथ ही छिन गया मां का साया
कल्पना के जीवन की कठिनाइयां जन्म के साथ ही शुरू हो गई थीं। उनके पैदा होते ही उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी दादी ललैया प्रजापति ने किया। परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों की कमी नहीं थी, लेकिन इन सबके बीच भी कल्पना ने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
पिता को खोने के बाद भी नहीं टूटा हौसला
साल 2024 में कल्पना के जीवन में एक और बड़ा दुख आया। प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) की परीक्षा से ठीक दो दिन पहले करंट लगने से उनके पिता गोधन लाल प्रजापति का निधन हो गया। इस हादसे के चलते वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। इतने बड़े सदमे के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं।
पूरे गांव के लिए गर्व का पल
कल्पना की इस सफलता से न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव में खुशी की लहर है। तमाम अभावों और दुखों को पार कर हासिल की गई यह उपलब्धि बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी परिस्थिति सपनों के रास्ते की दीवार नहीं बन सकती।
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