विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करौली महाराज के कैंची धाम का स्थापना दिवस महोत्सव इस वर्ष 15 जून को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। हर साल इस मौके पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए कैंची धाम पहुंचते हैं। भारी भीड़ के कारण नैनीताल-कैंची धाम मार्ग पर अक्सर जाम और डायवर्जन की स्थिति बन जाती है, जिसके चलते लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ती है। लेकिन इस बार श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक सुकून देने वाली खबर सामने आई है।
अब कैंची धाम पहुंचने के लिए एक ऐसा रास्ता भी मौजूद है, जो न केवल ट्रैफिक जाम से छुटकारा दिलाएगा, बल्कि यात्रियों को प्रकृति के बेहद करीब भी ले जाएगा। नैनीताल से कैंची धाम तक जाने वाला ब्रिटिश काल का पुराना पैदल मार्ग श्रद्धालुओं के लिए एक शानदार विकल्प साबित हो रहा है। खास बात यह है कि पर्यटन विभाग ने इस पुराने रास्ते का सौंदर्यीकरण और मरम्मत कराकर इसे एक आकर्षक ट्रैकिंग रूट के रूप में विकसित किया है।
नैनीताल से होती है ट्रैक की शुरुआत
यह ट्रैक नैनीताल की शेर का डांडा पहाड़ी में स्थित बिरला चुंगी से शुरू होता है और चोरसा तथा भवाली गांव होते हुए सीधे कैंची धाम तक पहुंचता है। अंग्रेजों के दौर में बने इस पैदल मार्ग का इस्तेमाल कभी स्थानीय लोग अपनी आवाजाही के लिए किया करते थे, लेकिन समय के साथ इस रास्ते का उपयोग कम होता चला गया। अब पर्यटन विभाग ने इसे दोबारा संवारकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक नए ट्रैकिंग रूट के रूप में तैयार किया है।
प्रकृति के करीब लेकर जाता है यह रास्ता
चीड़ और देवदार के घने जंगलों से होकर गुजरने वाला यह मार्ग प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। रास्ते में पक्षियों की मधुर चहचहाहट, पहाड़ी वादियों की शांति और छोटी-छोटी जलधाराएं यात्रियों को एक अनोखा अनुभव कराती हैं।
जिला पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी के मुताबिक, इस ट्रैकिंग रूट पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई इंतजाम किए गए हैं। दिशा संबंधी किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए मार्ग पर साइन बोर्ड लगाए गए हैं। इसके साथ ही रेस्ट पॉइंट्स, पेयजल की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के काम भी कराए गए हैं।
आगे और बढ़ेंगी सुविधाएं
पर्यटन विभाग का मानना है कि आने वाले समय में इस मार्ग पर और भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे यह धार्मिक पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म का एक आदर्श मॉडल बन सकेगा। इसके साथ ही इस ट्रैक से जुड़े स्थानीय गांवों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। स्थानीय लोग होम-स्टे, गाइड और अन्य पर्यटन गतिविधियों के जरिए अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे।
कैंची धाम पहले से ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। अब ट्रैकिंग के जरिए यहां पहुंचने का यह विकल्प खासतौर पर उन लोगों को आकर्षित करेगा, जो अपनी कैंची धाम यात्रा में प्रकृति और रोमांच का अनुभव भी जोड़ना चाहते हैं।
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