मशरूम की खेती करने वाले किसान अगर कुछ छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें तो वे एक ही फसल से दो तरह की कमाई कर सकते हैं। दरअसल, मशरूम तैयार करने के लिए एक खास तरह के बैग का इस्तेमाल किया जाता है। इसी बैग में खाद और दूसरी सामग्री डालकर मशरूम उगाया जाता है। उत्पादन पूरा होने के बाद ज्यादातर लोग इस बैग को खाद समेत कूड़े में फेंक देते हैं। जानकारी के अभाव में ऐसा होता है, जबकि यही बचा हुआ माल बागवानी और क्यारी लगाने वाले लोग खरीदने के लिए तैयार रहते हैं। खाद से भरे एक बैग की कीमत 600-700 रुपये तक मिल जाती है।
खेती और बागवानी दोनों में काम आता है यह बैग
बटन, ऑयस्टर या मिल्की मशरूम, इन सभी किस्मों को उगाने में इसी तरह के बैग का उपयोग होता है। इसी विषय पर मधुबनी की महिला किसान स्वाति ने बताया कि मशरूम निकालने के बाद इस बैग को फेंकना नहीं चाहिए। उनके मुताबिक इससे अतिरिक्त आमदनी हो सकती है, और चाहें तो इसे अपनी बागवानी और खेतों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
15 से 20 दिन में बन जाती है पोषक खाद
स्वाति बताती हैं कि मशरूम के बैग को थाली समेत 15 से 20 दिन तक सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद यह बढ़िया खाद में बदल जाता है, जिसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। उनका कहना है कि अगर इस खाद का इस्तेमाल अपने बगीचे में किया जाए तो फल-फूल, सब्जी और अनाज की पैदावार बढ़ जाती है।
स्वाति एक बोरी खाद 600-700 रुपये में बेचती हैं। उनके पास बागवानी और खेती के लिए यह खाद खरीदने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यह पूरी खाद मशरूम उत्पादन के बाद बचे हुए मटेरियल से ही तैयार होती है।
खाद में मिलते हैं कई पोषक तत्व
स्वाति के पिता ही उनके कृषि गुरु हैं, जो हमेशा उन्हें सिखाते रहते हैं कि खेती में सिर्फ परंपरागत तरीकों तक सीमित न रहें, बल्कि कुछ नया सोचना और करना चाहिए। उनका मानना है कि खेती में नए-नए प्रयोग करते रहना फायदेमंद रहता है।
कुछ शोधों का हवाला देते हुए स्वाति ने यह भी बताया कि बटन मशरूम की खाद जब सड़ती है तो उसमें 16 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व और तीन तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें नाइट्रोजन बनाने वाला एमिन भी मौजूद रहता है।
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