अगर आपकी उम्र 40 साल है, तो क्या यह जरूरी है कि आपका दिल भी उतना ही जवान हो? जरूरी नहीं। हो सकता है कि आपका दिल किसी 60 साल के व्यक्ति जितना बूढ़ा हो चुका हो। हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर मिलकर कम उम्र में ही दिल को तेजी से बूढ़ा बना सकते हैं।
दिल जवान है या बूढ़ा?
अगर आप यह मानकर चल रहे हैं कि आपकी असली उम्र जितनी है, आपका दिल भी ठीक उतना ही जवान है, तो शायद आप एक गलतफहमी में जी रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक आज के दौर में कई लोगों के दिल की उम्र उनकी वास्तविक उम्र से कहीं ज्यादा हो सकती है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजहें तेजी से बढ़ता मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बिगड़ी हुई जीवनशैली मानी जा रही हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के हालिया आंकड़ों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। सर्वेक्षण के अनुसार, 2023-24 में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 30.7 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की शिकार थीं, जबकि NFHS-5 (2019-21) में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत था। वहीं पुरुषों में यह अनुपात 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता मोटापा आने वाले समय में हृदय रोगों के मामलों को और बढ़ा सकता है।
आखिर दिल की उम्र होती क्या है?
दिल की उम्र यानी “कार्डियक एज” एक ऐसा पैमाना है जो बताता है कि आपका दिल और रक्त वाहिकाएं कितनी स्वस्थ हैं। यह जरूरी नहीं कि आपकी असली उम्र और दिल की उम्र एक-दूसरे के बराबर हों। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति भले ही 35 साल का हो, लेकिन अगर उसे मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बेहद कम शारीरिक सक्रियता जैसी समस्याएं हैं, तो उसके दिल की उम्र 50 या 60 साल के व्यक्ति जितनी हो सकती है।
AIIMS दिल्ली के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतीश नाइक के अनुसार, “हृदय आयु” लोगों को उनके दिल से जुड़े जोखिम को आसान भाषा में समझाने का एक असरदार तरीका है। इससे यह साफ हो जाता है कि दिल वास्तव में कितना स्वस्थ है।
मोटापा दिल को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी, खासकर पेट के आसपास की वसा, दिल के लिए सबसे खतरनाक मानी जाती है। यह शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन को बढ़ावा देती है, ब्लड प्रेशर ऊंचा करती है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बिगाड़ सकती है। इन सब वजहों से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है और दिल को सामान्य से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
सफदरजंग अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एच. एस. इस्सर का कहना है कि पेट की चर्बी सिर्फ शरीर का आकार ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यह कई मेटाबॉलिक गड़बड़ियों को जन्म देती है, जो आगे चलकर दिल की बीमारियों की वजह बन सकती हैं।
सिर्फ वजन नहीं, मेटाबॉलिक हेल्थ भी अहम
डॉक्टरों का कहना है कि अक्सर लोग केवल अपने वजन पर ध्यान देते हैं, जबकि मेटाबॉलिक हेल्थ का महत्व भी उतना ही है। कई बार व्यक्ति बाहर से पूरी तरह स्वस्थ नजर आता है, लेकिन उसके भीतर इंसुलिन रेजिस्टेंस, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर या खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी दिक्कतें मौजूद रहती हैं। ये सभी धीरे-धीरे दिल को नुकसान पहुंचाती रहती हैं।
सबसे चिंता की बात यह है कि हृदय से जुड़ी क्षति अक्सर लक्षण सामने आने से कई साल पहले ही शुरू हो जाती है। जब तक सीने में दर्द, सांस फूलना या दूसरे संकेत दिखने लगते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
दिल को जवान बनाए रखने के लिए क्या करें?
नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव पर नियंत्रण दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके साथ ही समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
याद रखें कि कैलेंडर पर दर्ज आपकी उम्र और आपके दिल की उम्र अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपका दिल लंबे समय तक स्वस्थ बना रहे, तो आज से ही अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव करना शुरू कर दें।
https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-how-young-is-your-heart-really-obesity-may-be-aging-it-faster-says-aiims-doctor-ws-l-10567252.html