84 की उम्र में सेवा की मिसाल: 40 साल से अपने खर्च पर बाणगंगा के कुंड साफ करा रहीं धनती राठौर

शिवपुरी की 84 वर्षीय धनती राठौर पिछले 40 वर्षों से हर मानसून से पहले अपने निजी खर्च पर बाणगंगा धाम के ऐतिहासिक कुंडों की सफाई करवाती हैं। इस बार सफाई के दौरान एक कुंड में करीब 3 फीट लंबा मगरमच्छ का बच्चा भी मिला।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से आस्था और सेवा की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है। शिव की इस नगरी में 84 वर्ष की बुजुर्ग धनती राठौर पिछले 40 सालों से एक ऐसा पुण्य कार्य कर रही हैं, जिसकी चर्चा अब चारों ओर हो रही है। मौसम चाहे चिलचिलाती धूप का हो या कड़ाके की ठंड का, वे हर दिन बाणगंगा धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना करती हैं।

मानसून की दस्तक से ठीक पहले उनका एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। हर साल की तरह इस बार भी जैसे ही बारिश का मौसम नजदीक आया, बाणगंगा परिसर में डीजल पंपों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। दरअसल, धनती राठौर हर वर्ष अपने निजी खर्च पर बाणगंगा के इन ऐतिहासिक कुंडों की पूरी सफाई करवाती हैं, ताकि आने वाली बरसात में इनमें केवल साफ और शुद्ध पानी ही जमा हो सके।

40 वर्षों से अनवरत चल रहा सफाई का यह अभियान

शिवपुरी के फिजिकल क्षेत्र में रहने वाले हरिओम राठौर की माता धनती राठौर (उम्र 84 वर्ष) की बाणगंगा धाम के प्रति गहरी और अटूट आस्था है। वे बताती हैं कि कई साल पहले जब उन्होंने यहां आकर देखा कि कुंडों में भारी गंदगी जमा है और उसी दूषित पानी में बच्चे, महिलाएं तथा युवा स्नान करने को मजबूर हैं, तो उनका मन द्रवित हो उठा। उसी क्षण उन्होंने संकल्प लिया कि हर साल बारिश से पहले वे इन कुंडों को पूरी तरह साफ करवाएंगी।

यह सिलसिला पिछले 40 वर्षों से लगातार जारी है। यही वजह है कि इन कुंडों में केवल एक ही साल का कचरा जमा हो पाता है, जिसे मानसून आने से पहले ही हटा दिया जाता है। इसके बाद जब पहली बारिश होती है, तो इन कुंडों का पानी शीशे की तरह चमकने लगता है।

'पैसों का इंतजाम ईश्वर ही करते हैं'

जब धनती राठौर से पूछा गया कि इतने बड़े पैमाने पर कई कुंडों की सफाई कराने में भारी खर्च आता होगा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह सब उनकी ताकत से नहीं, बल्कि ईश्वर की मर्जी से होता है। उनका कहना है कि भोलेनाथ ही सारी व्यवस्था करते हैं और उन्हीं की कृपा से यह काम हर साल बिना किसी बाधा के पूरा हो जाता है।

महाभारत काल से जुड़ा है बाणगंगा का गौरवशाली इतिहास

शिवपुरी की बाणगंगा का इतिहास बेहद प्राचीन और महाभारत कालीन माना जाता है। स्थानीय किंवदंतियों और मान्यताओं के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र इसी परिसर में मौजूद एक विशाल पेड़ के खोखल में छिपाकर रखे थे। जब पांडवों को प्यास लगी और पानी की आवश्यकता हुई, तब अर्जुन ने धरती पर बाण चलाकर जलधारा प्रकट की थी। माना जाता है कि इसी बाण से यहां 52 कुंडों का निर्माण हुआ, जिसके चलते इस पवित्र स्थल को 'बाणगंगा' के नाम से जाना जाता है। यहां पेड़ के बीचों-बीच एक प्राचीन सिद्ध मंदिर भी स्थापित है।

सफाई के दौरान निकला मगरमच्छ, रेस्क्यू टीम को दी गई सूचना

बाणगंगा के ये कुंड जितने आस्था का केंद्र हैं, उतने ही संवेदनशील भी हैं। जिन कुंडों में स्थानीय लोग और बच्चे रोज कूद-कूदकर नहाते हैं, वहां अक्सर मगरमच्छ भी आ जाते हैं। इस बार भी सफाई के दौरान जब डीजल पंप से एक कुंड का पानी कम किया गया, तो तली में करीब 3 फीट लंबा मगरमच्छ का बच्चा रेंगता हुआ दिखाई दिया।

मगरमच्छ दिखने के तुरंत बाद इसकी सूचना माधव टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम को दी गई। वन्यजीव विभाग की टीम जल्द ही मगरमच्छ को सुरक्षित रेस्क्यू कर अपने साथ ले जाएगी। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने अपील की है कि भविष्य में कुंडों में स्नान करने वाले श्रद्धालु और बच्चे पूरी सावधानी बरतें।

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