कोई भी विचार किसी भी समय और किसी भी जगह से मन में आ सकता है, लेकिन असली परीक्षा इस बात की होती है कि उसे जमीन पर कैसे उतारा जाए। पूर्णिया के बीटेक इंजीनियर रविरंजन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने अपनी रोजमर्रा की एक परेशानी को ही कारोबार का आधार बना लिया।
हॉस्टल की परेशानी से जन्मा विचार
बीटेक की पढ़ाई के दिनों में रविरंजन को हॉस्टल में कपड़े धोने की बड़ी दिक्कत झेलनी पड़ती थी। एक ओर पढ़ाई का दबाव और दूसरी ओर लॉन्ड्री के लिए की जाने वाली भागदौड़, यह दोनों मिलकर उनके लिए बड़ी चुनौती बन गए थे। यहीं से उनके मन में कुछ नया करने का खयाल पनपने लगा।
फूड डिलीवरी से मिली दिशा
रविरंजन ने महसूस किया कि जब आज के दौर में फूड डिलीवरी ऐप के जरिए खाना सीधे घर तक पहुंच सकता है, तो फिर लॉन्ड्री की सुविधा भी इसी तरह घर बैठे क्यों नहीं मिल सकती। यही सवाल उनके लिए एक नई राह बन गया।
स्वदेशी स्टार्टअप की शुरुआत
इसी सोच ने उनके मन में एक स्वदेशी स्टार्टअप का बीज बो दिया, जिसे उन्होंने 'धोबी जी' नाम दिया। इस पहल के जरिए उन्होंने न केवल लॉन्ड्री की दुनिया को नया रूप देने की कोशिश की, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार किए। उनके इस उद्यम से अब तक 500 लोगों को रोजगार मिल चुका है।
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