आगरा की उपजाऊ ज़मीन की 8 सब्ज़ियां और फसलें, जिनसे किसान कमा सकते हैं मोटा मुनाफा

यमुना किनारे बसे आगरा की मिट्टी बेहद उपजाऊ मानी जाती है, जहां कई तरह की सब्ज़ियों और फसलों की बंपर पैदावार होती है। जानिए वे 8 प्रमुख फसलें जिनकी खेती किसानों को अच्छा लाभ देती है।

उत्तर प्रदेश का आगरा सिर्फ ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी फसलों के लिए भी पहचाना जाता है। यमुना के किनारे बसे होने के कारण यहां की धरती बेहद उपजाऊ है। कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो ज़्यादातर ज़मीन खेती के लिए उपयुक्त है। आगरा और इसके आसपास के देहाती इलाकों में बड़े पैमाने पर अलग-अलग किस्म की फसलें उगाई जाती हैं। आइए जानते हैं यहां की उन 8 प्रमुख फसलों के बारे में, जिनकी खेती से किसानों को बढ़िया कमाई होती है।

आलू

आगरा में आलू की खेती बड़े स्तर पर होती है। यहां का आलू इतना मशहूर है कि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ कई अन्य राज्यों में भी इसकी आपूर्ति की जाती है।

भिंडी

आलू की तरह ही आगरा में भिंडी की फसल भी बड़े पैमाने पर तैयार होती है। किसानों के मुताबिक यहां की भिंडी देशी खाद और डी.ए.पी. की मदद से उगाई जाती है। अच्छी और देशी खाद के चलते इसकी पैदावार भी बेहतर रहती है। आगरा में उगाई जाने वाली भिंडी लंबी और चमकदार होती है तथा खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है।

बैंगन

आगरा में बैंगन की खेती काफी प्रसिद्ध है, खासकर मोटे और गोल आकार के बैंगन की। किसानों का कहना है कि नदी के किनारे नमी बनी रहने के कारण यहां बैंगन की पैदावार बहुत अच्छी होती है। आगरा का बैंगन यहां के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई जिलों और राज्यों तक भेजा जाता है। एक किसान ने बताया कि खेत से तैयार होने के बाद बैंगन को सीधे मंडी पहुंचाया जाता है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता है।

टमाटर

उपजाऊ ज़मीन होने के कारण आगरा में टमाटर का उत्पादन भी व्यापारिक स्तर पर होता है। यहां कई किस्मों के टमाटर उगाए जाते हैं। किसानों के अनुसार मौसम के हिसाब से खेतों में अलग-अलग वैरायटी लगाई जाती है। गर्मियों के समय तैयार होने वाला टमाटर दिखने में एकदम देशी जैसा लगता है और इसका स्वाद भी देशी टमाटर जैसा ही होता है, बस इसका छिलका थोड़ा मोटा रहता है।

पालक

यमुना और अन्य नदियों के कारण आगरा की ज़मीन में नमी बनी रहती है, और ऐसी नम जगह पर पालक की बढ़वार बहुत अच्छी होती है, जिससे किसानों को फायदा मिलता है। किसानों के मुताबिक आगरा के कई इलाकों में पालक की खेती होती है, क्योंकि इसमें लागत कम और मुनाफा अच्छा रहता है। बीज रोपण के करीब 45 से 50 दिनों में पालक कटाई के लायक तैयार हो जाता है। खास बात यह है कि एक बार बीज रोपने के बाद इसे तीन से चार बार काटा जा सकता है, जिससे किसानों को कहीं ज़्यादा फायदा होता है।

मूंग

सब्ज़ियों के अलावा आगरा में मूंग की फसल भी बड़े स्तर पर उगाई जाती है। कम लागत और अच्छे मुनाफे के कारण किसान अपने खेतों में मूंग लगाना पसंद करते हैं। एक किसान ने बताया कि यहां की मूंग राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे कई राज्यों में भेजी जाती है। देशी तरीके से तैयार होने के कारण आगरा की मूंग खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है। इससे बनी दाल और दूसरी चीज़ें लोगों को खूब पसंद आती हैं, यही वजह है कि इसकी मांग बनी रहती है।

कद्दू (पेठा)

आगरा में बड़े पैमाने पर पेठा तैयार किया जाता है, और जिस फल से पेठा बनता है उसे कद्दू कहते हैं। इसी वजह से यहां कद्दू की काफी मांग रहती है और किसान अपने खेतों में बड़े स्तर पर इसकी खेती करते हैं। सफेद कद्दू से पेठा बनाया जाता है, जबकि हरा कद्दू सब्ज़ी और रायते जैसी चीज़ों में इस्तेमाल होता है। किसानों का कहना है कि कद्दू की खेती से उन्हें अच्छा लाभकारी मूल्य मिलता है। आगरा के व्यापारी इसे खरीदकर पेठा बनाने वालों को आपूर्ति करते हैं।

लौकी

आगरा में लौकी की फसल भी खूब मशहूर है, जिसे बड़ी-बड़ी बेलों पर उगाया जाता है। इसे जैविक खेती और देशी खाद की मदद से तैयार किया जाता है। किसानों के अनुसार यहां लौकी की खेती में किसी केमिकल या इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं होता। यही कारण है कि आसपास के इलाकों में आगरा की लौकी सबसे ज़्यादा पसंद की जाती है और खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है।

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