इंदौर में BRICS कृषि सम्मेलन संपन्न, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनी साझा रणनीति

इंदौर में पांच दिन चले BRICS कृषि सम्मेलन का समापन खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय, कृषि नवाचार और जलवायु अनुकूल खेती पर व्यापक सहमति के साथ हुआ। सदस्य देशों ने भविष्य की कृषि रणनीति का खाका पेश करते हुए एक साझा दस्तावेज तैयार किया।

ऐसे दौर में जब दुनिया खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है, इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय BRICS कृषि सम्मेलन व्यापक सहमति के साथ संपन्न हुआ। आखिरी दिन सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भविष्य की कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत, टिकाऊ और समावेशी बनाने पर गहन चर्चा की।

खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय, कृषि व्यापार, तकनीकी नवाचार और जलवायु अनुकूल खेती जैसे विषयों पर बनी सहमति को एक साझा दस्तावेज के रूप में अंतिम रूप दिया गया। विशेषज्ञों का आकलन है कि इंदौर से निकले ये सुझाव आने वाले वर्षों में करोड़ों किसानों और वैश्विक कृषि नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस सम्मेलन में शामिल हुए।

चार प्रमुख विषयों के इर्द-गिर्द रही चर्चा

सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने चार मुख्य विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। इनमें खाद्य सुरक्षा और पोषण को मजबूत करना, कृषि व्यापार को बढ़ावा देना, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करना तथा कृषि अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाना शामिल रहा।

जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि उत्पादन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए विशेषज्ञों ने इस चर्चा को बेहद अहम बताया। कई देशों ने अपने अनुभव साझा किए और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई।

किसानों की आय बढ़ाने पर खास ध्यान

बैठक में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के उपायों पर भी ध्यान केंद्रित रहा। सदस्य देशों ने आधुनिक तकनीक, डिजिटल कृषि, बेहतर बाजार व्यवस्था और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों को अधिक फायदा पहुंचाने की रणनीतियों पर विचार रखे।

कृषि क्षेत्र में तकनीकी साझेदारी बढ़ाने और खाद्य हानि को कम करने के तरीकों पर भी मंथन हुआ। माना जा रहा है कि इन प्रयासों से कृषि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला दोनों को मजबूती मिलेगी।

समापन पर तैयार हुआ साझा दस्तावेज

सम्मेलन के अंतिम चरण में सदस्य देशों की सहमति और सुझावों के आधार पर एक साझा दस्तावेज तैयार किया गया, जिसमें खाद्य सुरक्षा, कृषि नवाचार, जलवायु अनुकूल खेती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े अहम बिंदु शामिल हैं।

यह दस्तावेज भविष्य में BRICS देशों के बीच कृषि सहयोग बढ़ाने के लिए आधार दस्तावेज की भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से सदस्य देश साझा परियोजनाओं और अनुसंधान कार्यक्रमों को आगे बढ़ा सकेंगे।

BRICS वाटिका में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

समापन अवसर पर मेघदूत उपवन में विकसित BRICS वाटिका में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में यह कार्यक्रम वैश्विक कृषि साझेदारी का प्रतीक बनकर सामने आया।

मांडू की विरासत ने मोहा विदेशी मेहमानों का मन

सम्मेलन के दौरान 188 विदेशी प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक जहाज महल, हिंडोला महल और चंपा बावड़ी का भ्रमण किया। मांडू की स्थापत्य कला, बाग प्रिंट शिल्प और मालवा की संस्कृति ने मेहमानों को प्रभावित किया।

गाला डिनर में प्रतिनिधियों ने दाल-बाफला, ज्वार-मक्का की रोटी और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखा। कई विदेशी प्रतिनिधियों ने मांडू को विश्व स्तरीय विरासत और भारतीय आतिथ्य का बेहतरीन उदाहरण बताया। इससे पहले विदेशी मेहमानों ने इंदौर की स्वच्छता, मालवा के व्यंजन, 56 दुकान, सराफा और राजवाड़ा का भी अनुभव किया।

इंदौर बना वैश्विक कृषि संवाद का केंद्र

पांच दिनों तक इंदौर वैश्विक कृषि नीति और सहयोग का केंद्र बना रहा। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि जैसी चुनौतियों का हल केवल वैश्विक साझेदारी से ही संभव है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर सम्मेलन से निकले सुझाव और साझा दस्तावेज आने वाले वर्षों में BRICS देशों के बीच कृषि सहयोग को नई रफ्तार देंगे और किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे।

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