गाजियाबाद के सीवर में मिला पोलियो वायरस, डेढ़ लाख की आबादी वाले 12 इलाकों में घर-घर सर्वे शुरू

गाजियाबाद के डुंडाहेड़ा एसटीपी से लिए गए सैंपल में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है और 107 टीमें घर-घर जाकर सैंपल जुटा रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अब भी पोलियो मुक्त है और मिला हुआ स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक नहीं है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से आई एक खबर ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्य महकमे की भी चिंता बढ़ा दी है। जिले के डुंडाहेड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से लिए गए दूषित पानी के सैंपल की जांच में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV1) की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद विभाग हरकत में आया और आनन-फानन में टीमों को मैदान पर उतार दिया गया। फिलहाल 107 टीमें घर-घर जाकर सैंपल इकट्ठा करने में जुटी हैं।

एक हफ्ते में 30 हजार घरों तक पहुंचीं टीमें

स्वास्थ्य विभाग ने एक हफ्ते के भीतर ही 30 हजार घरों का सर्वे पूरा कर लिया है। इसी अभियान के दौरान 5,421 घरों की गहन जांच की गई, जिनमें पांच साल से कम उम्र के 2,590 बच्चे शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार चिह्नित 12 इलाकों में से दो — बुलंदशहर और शास्त्री नगर — का सर्वे पूरा हो चुका है।

किन इलाकों में चल रहा सर्वे

जिन अन्य क्षेत्रों में सर्वे का काम जारी है, उनमें राज नगर, दौलतपुरा, पंचवटी कोट गांव, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्टा, मिर्जापुर, विजय नगर 1, विजय नगर 2 और खराती नगर शामिल हैं। इन इलाकों में करीब 1.5 लाख लोग रहते हैं।

5 जून को मिला था वायरस

यह वायरस 5 जून को विजय नगर सीवेज पंपिंग स्टेशन से लिए गए एक सैंपल में पाया गया था। इसके बाद डिस्ट्रिक्ट सर्विलांस यूनिट ने सीवेज ड्रेनेज नेटवर्क का नक्शा तैयार किया और प्रभावित क्षेत्र के दायरे में आने वाले 12 इलाकों की पहचान की। सर्वे मंगलवार से शुरू हुआ, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) बारीकी से नजर रख रहे हैं। राहत की बात यह है कि मिला हुआ स्ट्रेन बहुत खतरनाक नहीं है। एक अधिकारी ने बताया कि इससे पहले वाराणसी और मेघालय में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, और हर दो हफ्ते में रूटीन सैंपल कलेक्शन व टेस्ट किए जाते हैं।

आखिर हुआ क्या है?

गाजियाबाद के डुंडाहेड़ा STP से सीवर का नमूना लिया गया था, जिसकी जांच में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV1) मिला। यह वायरस ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) से जुड़ा हुआ पाया गया। अब तक किसी भी बच्चे में पोलियो का मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग, केंद्र सरकार और WHO मिलकर पूरी स्थिति पर निगरानी रख रहे हैं।

क्या भारत में फिर लौट आया पोलियो?

इसका जवाब है — नहीं। भारत अब भी पोलियो मुक्त देश बना हुआ है। देश में वाइल्ड पोलियो वायरस का आखिरी मामला 2011 में दर्ज हुआ था। इसके बाद लगातार तीन साल तक कोई मामला सामने न आने पर WHO ने 2014 में भारत को पोलियो-मुक्त घोषित किया था। सीवर में वायरस मिलने का यह मतलब कतई नहीं है कि पोलियो की बीमारी वापस आ गई है।

वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस (VDPV) क्या है?

पोलियो की ओरल वैक्सीन (OPV) में वायरस का कमजोर रूप मौजूद होता है, जो शरीर में जाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता तैयार करता है। टीका लेने के बाद यह कमजोर वायरस कुछ समय तक आंतों में रहता है और मल के जरिए शरीर से बाहर निकल सकता है। आमतौर पर इससे कोई खतरा नहीं रहता, लेकिन अगर किसी इलाके में टीकाकरण कम हो और वायरस लंबे समय तक फैलता रहे तो उसमें आनुवंशिक बदलाव (Mutation) हो सकते हैं। दुर्लभ मामलों में यही वायरस दोबारा फैलने की क्षमता हासिल कर लेता है, जिसे वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस कहा जाता है।

सीवर में वायरस की तलाश क्यों?

इस प्रक्रिया को पर्यावरणीय निगरानी (Environmental Surveillance) कहा जाता है, जिसके तहत सीवर के पानी की जांच की जाती है ताकि बीमारी फैलने से पहले ही वायरस की मौजूदगी का पता चल सके। विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो से संक्रमित अधिकांश लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, इसलिए सीवर की निगरानी शुरुआती चेतावनी की तरह काम करती है।

क्या बच्चों को कोई खतरा है?

अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह वायरस गैर-घातक (Non-virulent) है और किसी भी बच्चे में पोलियो संक्रमण या लकवे जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। फिर भी एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

पोलियो के लक्षण

  • बुखार
  • थकान
  • सिरदर्द
  • उल्टी
  • गर्दन में अकड़न
  • मांसपेशियों में दर्द
  • हाथ-पैरों में कमजोरी
  • अचानक लकवा (Acute Flaccid Paralysis)
  • स्थायी विकलांगता

माता-पिता क्या करें?

  • बच्चों का पोलियो टीकाकरण समय पर कराएं।
  • पल्स पोलियो अभियान में जरूर हिस्सा लें।
  • टीके की कोई भी खुराक न छोड़ें।
  • स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में पूरा सहयोग करें।
  • किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें।

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