नागौर जिले के हरसोलाव गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। यहां एक मुस्लिम परिवार की बेटी के विवाह के मौके पर हिंदू धर्म भाई ने मायरा भरकर रिश्तों की अनोखी मिसाल कायम की। इस दौरान उन्होंने सिर्फ परंपरा ही नहीं निभाई, बल्कि समाज को प्रेम, सद्भाव और इंसानी रिश्तों का संदेश भी दिया।
नराधणियों की ढाणी निवासी राकेश नराधणिया ने अपनी मुस्लिम धर्म बहन बाजू (ताहिरा) की बेटी के विवाह पर पहुंचकर मायरा भरा और 31 हजार रुपये नकद के साथ अन्य जरूरी सामान भेंट कर सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण प्रस्तुत किया।
पूरे रीति-रिवाज के साथ निभाई रस्म
नराधणियों की ढाणी निवासी धर्मेंद्र, पिता रामकिशोर फौजी, और धर्म भाई राकेश नराधणिया अपने परिजनों तथा दर्जनों ग्रामीणों के साथ हरसोलाव पहुंचे। उन्होंने अपनी धर्म बहन बाजू (ताहिरा) के घर आयोजित मायरे की रस्म में हिस्सा लिया और पूरे रीति-रिवाज के साथ भात भरकर रिश्ते की मर्यादा निभाई। इस मौके पर उन्होंने विवाह की तैयारियों में भी सक्रिय सहयोग दिया। मायरे में परिवार की अन्य महिलाओं ने भी भागीदारी निभाई।
हिंदू परिवार के सदस्यों को मुस्लिम बहन के घर पारंपरिक रस्में निभाते देख ग्रामीणों ने इस अनूठे भाईचारे की जमकर सराहना की। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बताया।
सात वर्ष पहले बना था धर्म का रिश्ता
जानकारी के अनुसार, हरसोलाव निवासी मुस्तकीम राजावत की पत्नी बाजू (ताहिरा) ने लगभग सात वर्ष पहले नराधणियों की ढाणी निवासी राकेश नराधणिया को धर्म भाई बनाया था। तभी से दोनों परिवारों के बीच आत्मीय और पारिवारिक रिश्ता बना हुआ है। समय-समय पर दोनों परिवार एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते रहे हैं।
बेटी के विवाह के अवसर पर धर्म भाई राकेश नराधणिया ने बहन के घर पहुंचकर मायरा भरा और अपने रिश्ते का फर्ज निभाया। उन्होंने बहन के परिवार को 31 हजार रुपये नकद सहित अन्य आवश्यक सामग्री भेंट की।
वर्षों से कायम है आपसी अपनापन
इस अवसर पर धर्मेंद्र नराधणिया, रामनिवास जांणी, रामेश्वर नराधणिया, मनोज नराधणिया, पूर्व सरपंच कन्हैयालाल गुर्जर सहित आसपास के अनेक लोग मौजूद रहे। रामनिवास जांणी ने बताया कि हरसोलाव गांव में हिंदू और मुस्लिम समुदाय वर्षों से प्रेम और भाईचारे के साथ रहते आ रहे हैं। यहां दोनों समाजों के बीच इतना अपनापन है कि कभी यह महसूस ही नहीं होता कि किसी दूसरे धर्म के परिवार का मायरा भरा जा रहा है।
रिश्ते में कभी आड़े नहीं आया मजहब
वहीं बाजू (ताहिरा) ने भावुक होकर कहा कि उनके और धर्म भाई राकेश के रिश्ते में कभी मजहब आड़े नहीं आया। वह अपने धर्म भाई और भाभी को सगे भाई-भाभी की तरह मानती हैं।
दोनों परिवारों के बीच हमेशा आत्मीयता, विश्वास और सम्मान का रिश्ता बना रहा है।
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