हाइब्रिड टमाटर की खेती में मुनाफा चाहिए तो ये गलतियां न करें, वरना उठाना पड़ सकता है घाटा

मानसून से पहले टमाटर की तैयारी में जुटे किसानों को इस बार अलनीनो के असर और जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार सही समय पर बेड तैयारी, मल्चिंग और प्लांटिंग से ही नुकसान टाला जा सकता है।

मानसून के नज़दीक आते ही किसान एक बार फिर टमाटर की फसल की तैयारियों में जुट गए हैं। लेकिन इस बार दो वजहें चिंता बढ़ा रही हैं — एक तरफ अलनीनो का प्रभाव है, तो दूसरी तरफ कई किसान ज्यादा मुनाफे की चाह में जल्दबाजी कर रहे हैं, जो आगे चलकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि टमाटर उगाने वाले किसानों को किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।

सागर का टमाटर कई राज्यों तक पहुंचता है

सागर जिले में बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती होती है और यहां का टमाटर यूपी, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों तक भेजा जाता है। जिले में पिछले 8-10 सालों से यह रुझान देखने को मिल रहा है कि ड्रिप और मल्चिंग पद्धति अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जो किसान पूरी मेहनत और लगन से इस तरीके से खेती कर रहे हैं, वे प्रति एकड़ दो लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं।

बारिश से पहले बेड और मल्चिंग जरूरी

रहली में पदस्थ वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी विदेश प्रजापति बताते हैं कि कुछ ही दिनों में मानसून सीजन की शुरुआत होने वाली है। यदि कोई फसल ड्रिप पर लगानी है तो बारिश शुरू होने से पहले बेड प्रिपरेशन पूरा कर लेना चाहिए और मल्चिंग भी डाल देनी चाहिए।

उनके अनुसार, यदि बारिश शुरू हो गई तो सारी मेहनत बेकार चली जाएगी, क्योंकि उसके बाद बेड निकालना संभव नहीं रहेगा। अगर बारिश के बीच में अंतराल मिल जाए तो ठीक है, लेकिन लगातार बारिश की स्थिति में बिना बेड के खेती नहीं हो पाएगी। यही वजह है कि सारी तैयारी पहले ही पूरी कर लेनी चाहिए। उनका कहना है कि इस बार पिछले साल की तुलना में दो से ढाई गुना अधिक किसान मल्चिंग और ड्रिप की ओर बढ़ रहे हैं और खेतों में भी इसका असर साफ दिख रहा है।

जल्दबाजी से बचें, धैर्य रखें

विशेषज्ञ की सलाह है कि किसी भी काम में जल्दबाजी न करें। कुछ किसानों ने अभी से नर्सरी डाल दी है और कुछ की नर्सरी 10-15 दिन की हो चुकी है। जो किसान जल्दी प्लांटिंग करेंगे, उन्हें रोग और कीटों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि शुरुआत में तापमान ज्यादा रहता है।

ऐसी स्थिति में दवाई और खाद पर इतना खर्च बढ़ जाता है कि लागत बढ़ने से मुनाफा कमाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए धैर्य बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञ की सलाह है कि अभी 10 दिन बाद नर्सरी की तैयारी करें और 10 जुलाई तक टमाटर की प्लांटिंग पूरी कर लें। जो किसान जल्दबाजी में हैं, उन्हें फिलहाल रुक जाना चाहिए।

बीज, पौधे और उत्पादन का गणित

एक एकड़ में लगभग 40 से 50 ग्राम हाइब्रिड बीज की आवश्यकता होती है। एक एकड़ के लिए 8000 से 10000 पौधे पर्याप्त रहते हैं, जिनके बीच डेढ़ फीट तक की दूरी रखनी चाहिए। अब बाजार में टमाटर की ऐसी किस्में भी आ चुकी हैं जो 50 से 55 दिन में ही फल देने लगती हैं। एक एकड़ से 200 से 300 क्विंटल टमाटर का उत्पादन लिया जा सकता है।

मिट्टी की जांच के अनुसार उर्वरक

टमाटर की प्लांटिंग से पहले खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ बेसल डोज डाले जाते हैं। साथ ही मिट्टी हेल्थ कार्ड की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का छिड़काव करना चाहिए।

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