चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने अहम आदेश सुनाते हुए सीबीआई को बड़ी राहत दी है। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें आरोपी एसबी सिन्हा के घर से जब्त किए गए करीब 38 लाख रुपये के आभूषण उनके परिजनों को वापस सौंपने का निर्देश दिया गया था। सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एसबी सिन्हा के पुत्र रवि सिन्हा सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला चारा घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई की छापेमारी से जुड़ा है। जांच के दौरान पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी एस.बी. सिन्हा के ठिकानों से लाखों रुपये मूल्य के कीमती जेवर बरामद किए गए थे। हाल ही में सीबीआई की विशेष अदालत ने इन आभूषणों को परिजनों को लौटाने का आदेश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ सीबीआई ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया और दलील दी कि यह संपत्ति घोटाले की अवैध कमाई से अर्जित की गई हो सकती है, इसलिए इसे वापस नहीं किया जाना चाहिए।
सीबीआई ने अदालत में क्या कहा
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि 13 और 14 मई 1999 को एसबी सिन्हा के घर से जेवरात जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक एसबी सिन्हा का निधन 1999 में और उनकी पत्नी रमा सिन्हा का निधन 2011 में हुआ था। सीबीआई का कहना है कि रमा सिन्हा ने अपने जीवनकाल में इन जेवरों पर स्त्रीधन के रूप में कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया।
एजेंसी ने यह भी बताया कि रवि सिन्हा ने वर्ष 2024 में विशेष सीबीआई अदालत में जेवर लौटाने की मांग को लेकर आवेदन दिया था, लेकिन अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज पेश नहीं किया। इसी आधार पर सीबीआई ने निचली अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्टे लगा दिया।
हाई कोर्ट ने रोक लगाकर मांगा जवाब
सीबीआई की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले की पूरी सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक ये आभूषण मालखाने यानी सरकारी अभिरक्षा में ही रहेंगे। साथ ही अदालत ने दिवंगत सिन्हा के बेटे रवि सिन्हा और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न निचली अदालत के इस आदेश को स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाए।
घोटाले के अहम किरदार थे एसबी सिन्हा
बिहार और झारखंड के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में शुमार चारा घोटाले में पशुपालन विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एस.बी. सिन्हा को मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक यानी किंगपिन माना जाता था। हालांकि मामले की कानूनी प्रक्रिया के दौरान ही उनका निधन हो गया था। हाई कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब सभी की निगाहें मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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