रसोई में चिकन, मटन या किसी भी चटपटे व्यंजन का स्वाद बढ़ाने के लिए लोग आमतौर पर कई तरह के गर्म मसालों का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि सिर्फ एक पत्ता डालकर भी खाने की महक और स्वाद को कई गुना बढ़ाया जा सकता है? ऑलस्पाइस के नाम से मिलने वाला यह पौधा बेहद खास माना जाता है। इसकी पत्तियों की सुगंध बिल्कुल मसालों जैसी होती है, और इन्हें डालने पर चिकन-मटन या किसी भी सब्जी में ऐसा स्वाद आ जाता है कि अलग से गर्म मसाला मिलाने की जरूरत भी काफी कम पड़ जाती है। खास बात यह है कि यह पत्ता स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद माना गया है।
पटना के पर्यावरणविद नरेश अग्रवाल ने इस पौधे को अपनी छत पर लगाया है और लगातार अलग-अलग सब्जियों में इसकी पत्तियों का उपयोग करते हैं।
एक पत्ती में पांच मसालों का स्वाद
नरेश अग्रवाल बताते हैं कि उनकी छत पर कई दुर्लभ और औषधीय पौधे मौजूद हैं, जिनमें ऑलस्पाइस का पौधा भी शामिल है। इसकी पत्तियों से मसालेदार सुगंध निकलती है। इसे सब्जी में डालते ही जायफल, जावित्री, लौंग, दालचीनी और काली मिर्च जैसे मसालों की खुशबू और स्वाद एक साथ महसूस होने लगता है।
चाय, कटहल की सब्जी, मांसाहारी पकवान या दूसरे व्यंजन बनाते समय इसकी महज एक पत्ती डाल देने से स्वाद कई गुना बढ़ जाता है और इसके बाद अलग से गर्म मसाला मिलाने की भी जरूरत नहीं रहती। ऑलस्पाइस की पत्तियों का इस्तेमाल शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजनों, बिरयानी तथा लेमन टी को खास स्वाद और खुशबू देने के लिए किया जाता है।
इसकी चाय का स्वाद बना देगा दीवाना
नरेश का कहना है कि ऑलस्पाइस की पत्तियों से बनी चाय का आनंद भी बिल्कुल अलग होता है। उनके अनुसार इसकी कुछ पत्तियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर चायपत्ती के डिब्बे में मिला देना चाहिए। इसके बाद जब भी चाय बनेगी, उसमें मसालों जैसी खुशबू और खास स्वाद मिलेगा। एक बार यह चाय पीने के बाद लोग बार-बार इसकी फरमाइश करने लगते हैं। अच्छी बात यह है कि ऑलस्पाइस का पौधा ज्यादातर नर्सरियों में आसानी से मिल जाता है।
देखभाल में नहीं लगती ज्यादा मेहनत
नरेश अग्रवाल के मुताबिक यह पौधा बहुत कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ता है। इसे न तो ज्यादा पानी की जरूरत होती है और न ही यह लंबे समय तक सूखा रहना पसंद करता है। जब मिट्टी सूखने लगे, तभी हल्का पानी देना सबसे अच्छा रहता है और मिट्टी में थोड़ी नमी बनी रहनी चाहिए। पौधे की बेहतर सेहत के लिए समय-समय पर इसकी पत्तियां तोड़ते रहना भी फायदेमंद माना जाता है।
दिलचस्प है इसके नाम के पीछे का इतिहास
ऑलस्पाइस का इतिहास काफी रोचक है। बताया जाता है कि मशहूर समुद्री यात्री क्रिस्टोफर कोलंबस ने अपने दूसरे अमेरिका अभियान के दौरान जमैका में इस सुगंधित मसाले को देखा था। 1620 के दशक में जब अंग्रेज इसके संपर्क में आए, तो उन्हें इसमें लौंग, दालचीनी, जायफल और काली मिर्च जैसे कई मसालों का स्वाद एक साथ महसूस हुआ। इसी वजह से उन्होंने इसका नाम ऑलस्पाइस रख दिया, यानी सभी मसालों का स्वाद एक साथ।
यह पौधा मूल रूप से दक्षिणी मेक्सिको और मध्य अमेरिका का एक मिड कैनोपी पेड़ है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए अब एशियाई देशों में भी इसे बड़े पैमाने पर उगाया जा रहा है।
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