सीकर जिले के थोरासी खरसाडू गांव में बनी पीर बाबा की मजार आज सांप्रदायिक सौहार्द की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। खास बात यह है कि इस गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं बसता, फिर भी मजार की पूरी देखरेख और पूजा-अर्चना यहां के हिंदू ग्रामीण ही करते हैं।
हिंदू मंदिरों जैसी परंपराएं
मजार पर ठीक वैसे ही धार्मिक रीति-रिवाज निभाए जाते हैं, जैसे हिंदू मंदिरों में होते हैं। यहां अखंड ज्योत निरंतर जलती रहती है और श्रद्धालु परिक्रमा भी लगाते हैं। भाद्रपद के महीने में मजार पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
चढ़ावे से हो रहा गांव का विकास
मजार पर आने वाले चढ़ावे की धनराशि का उपयोग पीर बाबा सेवा समिति गांव के विकास कार्यों में करती है। इसी राशि से गांव में फुटबॉल का एक भव्य स्टेडियम तैयार किया गया है और खेल से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
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