अगर आप बारिश के मौसम में किसी शांत और मनमोहक प्राकृतिक स्थल की तलाश में हैं, तो बोकारो और धनबाद की दामोदर सीमा पर नागदा में मौजूद सत्खटिया वॉटरफॉल आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यहां घने जंगलों और विशाल चट्टानों के बीच एक साथ दो झरनों का दुर्लभ और अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। मानसून के दौरान दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
बरसात में निखर जाती है दोगुनी सुंदरता
बारिश के मौसम में सत्खटिया वॉटरफॉल की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान दोनों झरनों का जलप्रवाह तेज हो जाता है। पूरा इलाका किसी कलाकार की बनाई हुई जीवंत पेंटिंग जैसा प्रतीत होता है। झरने के सामने फैली विशाल चट्टानें पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा फोटो प्वाइंट बन जाती हैं।
इन्हीं चट्टानों पर खड़े होकर युवा दोनों हाथ फैलाकर ‘शाहरुख खान पोज’ में तस्वीरें और सेल्फी खिंचवाते हैं और अपने इस दिन को यादगार बना लेते हैं।
कैसे पड़ा सत्खटिया वॉटरफॉल नाम?
यह झरना अपनी सुंदरता के साथ-साथ एक दिलचस्प लोककथा के लिए भी जाना जाता है। नागदा गांव के अर्जुन महतो बताते हैं कि इस जलप्रपात के पास दामोदर नदी के किनारे एक बेहद गहरा गड्ढा मौजूद है।
मान्यता है कि किसी समय इस गड्ढे की गहराई नापने के लिए सात खटियाओं की रस्सियों को आपस में जोड़ना पड़ा था। इसी वजह से इस स्थान का नाम ‘सत्खटिया वॉटरफॉल’ पड़ गया। हालांकि, यह केवल एक लोकमान्यता ही है।
कैसे पहुंचें सत्खटिया वॉटरफॉल?
सत्खटिया वॉटरफॉल बोकारो के तेलमच्चो ब्रिज से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचने के लिए गूगल मैप की मदद भी ली जा सकती है।
मानसून के दौरान आने वाले पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे फिसलन भरी चट्टानों और तेज जलधारा के आसपास पूरी सावधानी बरतें, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
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