प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक बेहद अहम यूरोप दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जो 18 जून तक चलेगा। इस दौरान वह फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा करेंगे और जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस पूरी यात्रा का सबसे चर्चित पहलू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी संभावित मुलाकात है।
बीते करीब डेढ़ साल में भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों में कुछ ठंडापन देखा गया है, इसी वजह से इस संभावित बैठक पर दुनिया भर की नजरें लगी हुई हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को नई रफ्तार देगा और इस दौरान पीएम मोदी ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज के रूप में सामने आएंगे। फ्रांस में वह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बड़ी द्विपक्षीय बैठक करेंगे और इसके बाद स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर जाएंगे।
फ्रांस के नीस में मैक्रों के साथ रणनीतिक बैठक
यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी 13 जून को फ्रांस के नीस शहर पहुंचेंगे। अगले दिन यानी 14 जून को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ उनकी एक बड़ी द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें दोनों नेता भारत और फ्रांस के संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे। इस साल दोनों देशों के रिश्तों को स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक पहुंचाया गया है।
नीस में दोनों नेता मिलकर ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। इस आयोजन में दुनिया भर के वेंचर कैपिटल फंड्स शिरकत करेंगे, जिससे भारत के कारोबारी क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
स्लोवाकिया की पहली ऐतिहासिक यात्रा से क्या मिलेगा
फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। साल 1993 में स्लोवाकिया को आजादी मिलने के बाद यह पहली बार है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री वहां जा रहा है। इस दौरान वह वहां के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से भी मुलाकात करेंगे।
इस यात्रा में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश पर खास चर्चा होगी। मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल और रेलवे विनिर्माण जैसे बड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे भारत के लिए यूरोप में नए बाजार खुलने की संभावना है।
जी-7 शिखर सम्मेलन में मोदी और ट्रंप की मुलाकात?
यात्रा के तीसरे चरण में पीएम मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियां में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन के इतर सबसे ज्यादा ध्यान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात पर रहेगा। पिछले करीब डेढ़ साल में भारत और अमेरिका के संबंधों में हल्की कमजोरी आई है, ऐसे में यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी और इससे रिश्तों की बर्फ पिघलने की उम्मीद की जा रही है।
इसके अलावा पीएम मोदी जी-7 में ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज के रूप में भारत का पक्ष रखेंगे और सुरक्षित एआई तथा सतत आर्थिक विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
पेरिस के विवाटेक समिट में स्टार्टअप्स को मिलेगी नई पहचान
दौरे के आखिरी चरण में प्रधानमंत्री 18 जून को पेरिस जाएंगे, जहां वह यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप आयोजन ‘विवाटेक समिट’ में शामिल होंगे और इसे संबोधित भी करेंगे। इससे भारतीय टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
इसके बाद पेरिस में प्रधानमंत्री के भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी संभावना है। विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस पूरी यात्रा से भारत और यूरोपीय संघ के संबंध और मजबूत होंगे।
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