रांची के धनेश्वर की हरियाली से कमाई की मिसाल, 16 साल पहले लगाए पेड़ अब रोज दे रहे 1600 रुपये

रांची से 15 किलोमीटर दूर पतरातू गांव के किसान धनेश्वर ने 16 साल पहले आम, कटहल, नींबू और सागवान के पेड़ लगाए थे, जिनसे अब गर्मी के मौसम में घर बैठे रोजाना करीब 1600 रुपये की कमाई हो रही है।

झारखंड की राजधानी रांची से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बसे पतरातू गांव के किसान धनेश्वर आज हरियाली से होने वाली कमाई की जीती-जागती मिसाल बन गए हैं। उनका कहना है कि आज से 16 साल पहले उन्होंने सागवान, कटहल, नींबू और आम के पेड़ लगाए थे। बीते वर्षों में ये पेड़ इतने बड़े हो चुके हैं कि अब फल भी देने लगे हैं और कटहल व आम की बिक्री से इस सीजन में अच्छी-खासी आमदनी हो रही है। वहीं सागवान की लकड़ी से उन्होंने घर का सारा फर्नीचर तैयार करवा लिया है और कुछ हिस्सा बाजार में बेचकर मुनाफा भी कमाया है।

कौन-कौन से पेड़ बने कमाई का जरिया

धनेश्वर बताते हैं कि उन्होंने नींबू, मिर्ची, बांस समेत कई तरह के पेड़ लगाए थे, लेकिन सबसे ज्यादा कमाई कटहल, नींबू और आम बेचने से होती है। फिलहाल गर्मी के मौसम में उनकी रोज की कमाई ₹1500 तक पहुंच जाती है। उनके मुताबिक सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि सागवान की लकड़ी से बना जो फर्नीचर बाजार में एक लाख रुपये से कम में नहीं मिलता, वह उन्हें घर पर ही बिना खर्च के तैयार मिल गया।

रोजाना के हिसाब-किताब का गणित

किसान का कहना है कि इस समय वे हर दिन आराम से 20 किलो तक कटहल बेच देते हैं, जिसका बाजार भाव ₹50 तक रहता है। सिर्फ इसी से ₹1000 की आमदनी हो जाती है। इसके अलावा उनके पास आम का पेड़ भी है, जिससे रोजाना 20 किलो आम बिकता है और कच्चा आम ₹30 किलो तक के भाव से जाता है।

आम से करीब ₹600 की कमाई हो जाती है। इस तरह हर दिन 1600 रुपये की आमदनी सहज ही हो जाती है। नींबू से भी आसानी से 100 रुपये निकल आते हैं, जबकि मिर्च और धनिया की कमाई इसके अलावा है। धनेश्वर के मुताबिक 16 साल पहले की गई उनकी मेहनत आज रंग ला रही है।

फलदार पेड़ लगाने की सलाह

यही वजह है कि वे अपने बच्चों को भी फलदार पेड़ लगाने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि आजकल के बच्चे सजावटी पौधे लगाते हैं, लेकिन शो प्लांट से कोई फायदा नहीं होता। उनके अनुसार फलदार पेड़ लगाना जरूरी है, क्योंकि इन पेड़ों में जमीन के भीतर पानी सहेजकर रखने की क्षमता काफी अधिक होती है।

पेड़ बने प्राकृतिक छतरी

धनेश्वर बताते हैं कि इससे गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत भी नहीं झेलनी पड़ती। उनके आंगन में लगे ये सभी पेड़ प्राकृतिक छतरी की तरह काम करते हैं, जिसके चलते उनके घर में कभी कूलर या एसी की जरूरत ही नहीं पड़ती। इतने सारे पेड़ों ने उनके आंगन को चारों ओर से घेर रखा है।

दोपहर में वे आंगन में आकर आराम से सो जाते हैं और उनका कहना है कि इसके आगे एसी भी फीका पड़ जाता है। अब वे और भी पेड़ लगा रहे हैं। हर साल वे आम, लीची और कटहल के 5 पेड़ लगाते हैं और आने वाली पीढ़ी को भी सलाह देते हैं कि अपने घर-आंगन में खूब पेड़ लगाएं।

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