पाकिस्तान को हमेशा से ऐसे देश के रूप में गिना जाता रहा है, जो खुलेआम आतंकियों को शरण देता आया है। उसकी मदद से कई आतंकी संगठनों ने न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हमलों को अंजाम दिया है। भारत में इसका सबसे ताजा उदाहरण पहलगाम में हुआ आतंकी हमला है। इतना ही नहीं, अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर हमले की साजिश रचने वाला कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन भी अपने अंतिम दिनों में पाकिस्तान में ही पाया गया था, जो इस बात का सीधा प्रमाण है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद को पनपाने के लिए होता रहा है। इसके बावजूद कई देश ऐसे हैं, जो पाकिस्तान की इन गतिविधियों को मजबूती देने के लिए उसे हथियारों की आपूर्ति करते आए हैं।
हथियार आपूर्ति में चीन सबसे आगे
पाकिस्तान को हथियार देने वाले देशों में सबसे पहला नाम चीन का आता है। चीन ने हाल ही में पाकिस्तान को हंगोर क्लास की पनडुब्बी सौंपी है। यह पनडुब्बी आज ही चीन से तैयार होकर पाकिस्तानी नौसेना में शामिल होने के लिए कराची पहुंची है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच इसे लेकर करीब 5 अरब डॉलर का समझौता हुआ है, जिसके तहत चीन कुल 8 हंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान को देगा। इनमें से पहली चार चीन में बनाई जा रही हैं, जबकि शेष चार का निर्माण कराची शिपयार्ड में किया जाएगा। ये पनडुब्बियां ‘एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) सिस्टम से लैस हैं, जो इन्हें लंबे समय तक पानी के भीतर बनाए रखने में मदद करती हैं।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के कुल हथियार आयात का 81 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन से आता है। पांच साल पहले यह आंकड़ा 74 प्रतिशत था, लेकिन समय के साथ पाकिस्तान में चीनी हथियारों का दबदबा बढ़ता गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन चुका है और वैश्विक हथियार आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 4.6 प्रतिशत है।
पाकिस्तानी वायुसेना में चीनी विमानों की भरमार
बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान की वायुसेना में सबसे ज्यादा बदलाव चीन की मदद से हुए हैं। पाकिस्तान ने चीन से J-10C फाइटर जेट खरीदे हैं, जिन्हें आधुनिक रडार और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस माना जाता है। इसके अलावा चीन निर्मित JF-17 थंडर ब्लॉक-3 भी उसकी वायुसेना का हिस्सा है। भविष्य की रणनीति के तहत पाकिस्तान ने चीन के J-35 (FC-31) स्टील्थ फाइटर जेट को अपनी वायुसेना में शामिल करने का सौदा अंतिम रूप दे दिया है। पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख ने खुद इस डील की पुष्टि की थी, जिसके बाद पाकिस्तान इस पांचवीं पीढ़ी के चीनी स्टील्थ विमान का पहला ग्राहक बन गया है। चीन का दावा है कि यह विमान रडार की पकड़ से बच निकलने में सक्षम है।
ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस भी चीन से
चीन और पाकिस्तान का सामरिक रिश्ता सिर्फ लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान ने चीन से ड्रोन भी हासिल किए हैं। विंग लूंग-2, सीएच-4 और सीएच-5 जैसे चीनी ड्रोन उसके पास मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल वह भारत में हथियारों की तस्करी और सीमावर्ती इलाकों की जासूसी में करता आया है। मिसाइल और एयर डिफेंस के क्षेत्र में भी चीन उसका सबसे बड़ा साझेदार है। PL-15 जैसी एयर-टू-एयर मिसाइलें पाकिस्तान को चीन से ही मिली हैं। इसके अलावा HQ-9P और HQ-16 जैसी एयर डिफेंस प्रणालियां भी उसकी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। हालांकि ये सिस्टम कितने कारगर हैं, इसकी पोल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया के सामने खुल चुकी है।
थल सेना और नौसेना में भी चीनी दखल
पाकिस्तान की थल सेना भी तेजी से चीनी हथियारों से लैस हो रही है। VT-4 या अल-हैदर टैंक इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जो उसके पुराने टैंकों की जगह ले रहे हैं। इनके अलावा SH-15 ट्रक माउंटेड हॉवित्जर तोप तथा फतह-1 और फतह-2 रॉकेट सिस्टम भी चीन के सहयोग से पाकिस्तान को मिले हैं। हाल ही में चीन ने Z-10ME अटैक हेलीकॉप्टर भी पाकिस्तानी सेना को दिए हैं, जिन्हें पुराने अमेरिकी कोबरा हेलीकॉप्टरों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
नौसेना में भी चीन पूरी तरह घुसपैठ कर चुका है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा रक्षा समझौता हंगोर क्लास पनडुब्बियों को लेकर हुआ है, जो चीन की युआन क्लास डिजाइन पर आधारित हैं। इसके अलावा टुगरिल क्लास फ्रिगेट्स भी पाकिस्तानी नौसेना का हिस्सा हैं, जो साइलो, टॉरपीडो और एयर डिफेंस सिस्टम से लैस हैं।
तुर्की समेत ये देश भी हैं हथियार साझेदार
चीन के अलावा पाकिस्तान के रक्षा साझेदार के रूप में तुर्की का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन तो दिए ही हैं, साथ ही वह युद्धपोत निर्माण और पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण में भी उसकी मदद कर रहा है। यूरोपीय देशों की बात करें तो नीदरलैंड्स ने पाकिस्तान को समुद्री निगरानी और गश्ती पोत उपलब्ध कराए हैं। फ्रांस ने कभी पाकिस्तान को मिराज लड़ाकू विमान और पनडुब्बियां दी थीं, हालांकि अब उसके साथ कोई नया रक्षा समझौता नहीं हुआ है। वहीं ब्रिटेन, इटली, जर्मनी और स्वीडन अब भी कुछ तकनीकी उपकरण, हेलीकॉप्टर, रडार और रक्षा प्रणालियां पाकिस्तान को मुहैया करा रहे हैं।
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