कोलकाता के अलीपुर इलाके में मौजूद नौ मंजिला सरकारी इमारत में लगी भयानक आग ने भारी तबाही मचा दी है। इस आग में करीब 4000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें यानी ईवीएम और वीवीपैट पूरी तरह जलकर राख हो गई हैं। ये सभी मशीनें हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई थीं। इतने बड़े हादसे के बाद अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरिंदम नियोगी ने जिला अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और चुनाव आयोग को पूरी 9 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही नुकसान की असल तस्वीर सामने आ पाएगी। पुलिस ने एहतियातन पूरे प्रभावित हिस्से को घेरे में ले लिया है और वहां किसी के भी आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।
9 पन्नों की रिपोर्ट में क्या बताया गया
अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरिंदम नियोगी ने 12 जून 2026 को खुद घटनास्थल का दौरा किया, जिस दौरान उनके साथ कई जिला अधिकारी भी मौजूद रहे। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। 9 पन्नों की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि गोदाम में रखी ईवीएम और वीवीपैट को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही एसएलयू और अन्य चुनावी सामग्री भी आग की चपेट में आकर जल गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल नुकसान की सटीक सीमा का अनुमान लगाना संभव नहीं है। पूरी फोरेंसिक जांच खत्म होने के बाद ही चुनाव आयोग को इस बारे में एक और विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी।
आग का अजीब रास्ता बढ़ा रहा शक
दक्षिण कोलकाता के अलीपुर इलाके की इस इमारत में दक्षिण 24 परगना जिला परिषद का दफ्तर भी मौजूद है। राज्य के अग्निशमन मंत्री कौशिक चौधरी ने खुद घटनास्थल का निरीक्षण किया और मीडिया से बातचीत में एक चौंकाने वाली जानकारी साझा की।
मंत्री के अनुसार आग सबसे पहले दूसरी और तीसरी मंजिल पर दिखी थी, लेकिन इसके बाद यह सीधे सातवीं और आठवीं मंजिल तक पहुंच गई। हैरानी की बात यह है कि बीच की चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल पर आग का कोई असर नहीं हुआ। यही वजह है कि इसे सामान्य आग नहीं माना जा रहा और प्रशासन को इसमें बड़ी तोड़फोड़ या किसी साजिश की आशंका सता रही है।
फोरेंसिक जांच और पुलिस की कार्रवाई
इस मामले में दक्षिण 24 परगना प्रशासन ने अलीपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस मामले के लिए विशेष फोरेंसिक विशेषज्ञों को तैनात किया है, जो लगातार मौके से नमूने जुटाने में जुटे हैं।
फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी या इसे जानबूझकर लगाया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और वहां किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
बंगाल की सियासत में मचा घमासान
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि इसमें किसी बड़ी तोड़फोड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, वहीं बीजेपी नेता राकेश सिंह ने इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। हालांकि अब तक किसी भी नेता ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।
दूसरी ओर दमकल विभाग के कर्मचारी अब भी कूलिंग ऑपरेशन में लगे हुए हैं। इमारत के कुछ हिस्सों से अब भी धुआं उठता देखा जा रहा है।
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