भोपाल में पकड़े गए एक संदिग्ध एजेंट ने ATS की पूछताछ के दौरान कई सनसनीखेज जानकारियां सामने रखी हैं। आरोपी मोहम्मद फराज एक पाकिस्तानी व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसी को पता चला कि इस ग्रुप का पाकिस्तानी हैंडलर भारतीय युवकों को अपने साथ जोड़कर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों के लिए भड़का रहा था। पूछताछ में ऐसे कई तथ्य उजागर हुए, जिन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया जा रहा है।
देवबंद के नईम अब्दुल्ला ने कराया हैंडलर से परिचय
पूछताछ में सामने आया कि भोपाल का रहने वाला फराज करीब 6 साल पहले देवबंद (उत्तर प्रदेश) निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में आया था। नईम अब्दुल्ला ने ही फराज की पहचान पाकिस्तानी हैंडलर से कराई थी, जिसके बाद वह धीरे-धीरे जिहाद के रास्ते पर बढ़ता चला गया। हैंडलर ने उसे बताया था कि वह कई और युवकों को भी इसी राह पर तैयार कर चुका है और अब फराज को भी हर मोर्चे के लिए तैयार रहना होगा।
फराज को सौंपा गया था खतरनाक काम
फराज ने बताया कि वह टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पाकिस्तान, भारत और दूसरे देशों के मुजाहिदों से जुड़ा हुआ था। नईम अब्दुल्ला ने उसके सामने पाकिस्तान के आतंकी खालिद सैफुल्लाह का नाम रखा था और उसी की तरह बनने की प्रेरणा दी थी। फराज को साफ निर्देश दिए गए थे कि समय आने पर उसे 'टारगेट किलिंग' को अंजाम देना होगा।
पाकिस्तान में ट्रेनिंग की थी योजना
ग्रुप में शामिल सभी युवकों को अपना पासपोर्ट तैयार रखने के लिए कहा गया था। इसके पीछे मकसद यह था कि ये सभी पाकिस्तान पहुंचकर वहां मुजाहिदीन की ट्रेनिंग ले सकें। इसी सिलसिले में फराज को ट्रेनिंग से जुड़े वीडियो भी भेजे गए थे।
क्या है 'मिशन 2047'?
जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य लक्ष्य PFI के 'मिशन 2047' के एजेंडे को धरातल पर उतारना था। फराज को भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था स्वीकार नहीं थी। उसकी योजना अन्य लड़ाकों के साथ मिलकर भारतीय शासन को उखाड़ फेंकने और देश में शरीयत कानून लागू करने की थी।
नईम अब्दुल्ला की तलाश में जुटी ATS
ATS को आरोपी मोहम्मद फराज के पास से बड़ी मात्रा में जिहादी सामग्री बरामद हुई है। फराज फिलहाल 16 जून तक रिमांड पर है। वहीं उसका साथी नईम अब्दुल्ला अब भी फरार है, जिसकी तलाश में ATS की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। नईम के खिलाफ STF में भी मामला दर्ज है।
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