नीम, तुलसी, गिलोय और अश्वगंधा: कब बन जाती हैं ये जड़ी-बूटियां सेहत के लिए मुसीबत, जानें जरूरी बातें

गिलोय, अश्वगंधा, नीम और एलोवेरा जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां प्राकृतिक होने के बावजूद बिना सही मार्गदर्शन या जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर लिवर समेत कई अंगों पर बुरा असर डाल सकती हैं। आयुष चिकित्सक के मुताबिक हर शरीर की प्रकृति अलग होती है, इसलिए सोच-समझकर ही इनका इस्तेमाल करना चाहिए।

सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए आजकल लोग तेजी से आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की ओर झुक रहे हैं। गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा, नीम, एलोवेरा, ब्राह्मी और त्रिफला जैसे हर्बल उत्पाद अब लगभग हर घर का हिस्सा बन चुके हैं। कोरोना काल के बाद इनका चलन और भी बढ़ गया, क्योंकि आम धारणा यही है कि जो चीज प्राकृतिक है वह पूरी तरह सुरक्षित भी होगी।

लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। किसी भी जड़ी-बूटी का जरूरत से अधिक या बिना उचित सलाह के सेवन शरीर पर उल्टा असर डाल सकता है और लंबे समय में लिवर सहित कई अंगों पर दबाव बना सकता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियां और उनके दूसरे पहलू

ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि गिलोय को इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में खूब लोकप्रियता मिली है, लेकिन कुछ मामलों में इसके अत्यधिक सेवन से लिवर एंजाइम्स में बदलाव और लिवर पर तनाव जैसी स्थितियां सामने आने की आशंका जताई गई है।

इसी तरह अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल कुछ लोगों में नींद से जुड़ी दिक्कतें, हार्मोनल असंतुलन या पेट की समस्याएं पैदा कर सकता है। नीम को आमतौर पर खून साफ करने और त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है, मगर इसका ज्यादा सेवन शरीर में कमजोरी या लो ब्लड शुगर जैसी स्थिति ला सकता है।

एलोवेरा जूस भी सीमित मात्रा में ही लाभदायक माना जाता है, अधिक मात्रा में लेने पर यह पेट दर्द या डायरिया जैसी परेशानी दे सकता है। वहीं ब्राह्मी दिमाग के लिए अच्छी मानी जाती है, लेकिन बिना सलाह के लंबे समय तक इसका उपयोग हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता।

किसी के लिए फायदेमंद, किसी के लिए नुकसानदेह

डॉ. राजकुमार के अनुसार आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग सोशल मीडिया या घरेलू सलाह के आधार पर इन हर्बल उत्पादों का सेवन शुरू कर देते हैं और यह नहीं समझते कि हर शरीर की प्रकृति अलग होती है। जो चीज एक व्यक्ति के लिए लाभकारी है, वही दूसरे के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है।

वे आगाह करते हैं कि खासकर डायबिटीज, थायरॉइड, लिवर या किडनी से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन नहीं करना चाहिए। कई बार ये हर्बल उत्पाद दवाइयों के साथ प्रतिक्रिया भी कर सकते हैं, जिससे शरीर पर अनचाहे साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं।

लिवर पर पड़ता है सबसे ज्यादा दबाव

डॉ. राजकुमार बताते हैं कि लिवर हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और पाचन में अहम भूमिका निभाता है। जब हम लगातार या गलत तरीके से किसी हर्बल सप्लीमेंट का सेवन करते हैं, तो लिवर पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

शुरुआत में यह असर हल्का दिखता है, जैसे थकान, भूख में कमी या हल्का पेट दर्द, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप भी ले सकता है। कई बार लोग इन शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं और समस्या और बढ़ जाती है।

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