राजधानी दिल्ली के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए तपती गर्मी में पसीने छुड़ा देने वाली खबर सामने आई है। वैश्विक तनाव और कोयले की आसमान छूती कीमतों से पैदा हुए गहरे ऊर्जा संकट का सीधा असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ने जा रहा है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राजधानी की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को उपभोक्ताओं से भारी-भरकम ‘फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज’ (FPPAS) वसूलने की छूट दे दी है।
इस फैसले के बाद बिजली कंपनियों पर लगी 10 प्रतिशत की पुरानी अधिकतम सीमा पूरी तरह समाप्त हो गई है। नतीजतन, बिना सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिलों में बड़ा उछाल आना अब लगभग तय है, जिसका सीधा बोझ मध्यम वर्ग के बजट पर पड़ेगा।
किस पर पड़ेगी मार, किसे मिलेगी राहत
बढ़े हुए सरचार्ज का असर केवल उन्हीं उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे से बाहर हैं। दिल्ली सरकार से पूर्ण यानी 100 प्रतिशत या 50 प्रतिशत सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं को इस झटके से पूरी तरह बाहर रखा गया है, उन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आखिर क्यों महंगी हुई बिजली
अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण ऊर्जा संकट गहरा गया है। इसके साथ ही विदेशों से आने वाले कोयले के आयात और उसके परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) खर्च में भारी बढ़ोतरी के चलते बिजली उत्पादन की लागत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
कंपनियों की मांग पर हटी 10% की सीमा
दिल्ली की प्रमुख बिजली कंपनियों—बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टाटा पावर (TPDDL) ने मई में आयोग के समक्ष गुहार लगाई थी कि अप्रैल में उनकी वास्तविक खरीद लागत बहुत अधिक रही, इसलिए सरचार्ज वसूलने की 10 प्रतिशत की अधिकतम सीमा में ढील दी जाए।
किस कंपनी को कितनी छूट
नए आदेश के तहत टाटा पावर (TPDDL) को पूरा 16 प्रतिशत एफपीपीएएस वसूलने की मंजूरी मिली है। वहीं अप्रैल महीने के लिए बीएसईएस राजधानी (BRPL) को कुल 17.94 प्रतिशत और बीएसईएस यमुना (BYPL) को कुल 17.43 प्रतिशत सरचार्ज वसूलने की हरी झंडी दी गई है।
मासिक आधार पर लागू रहेगा नियम
DERC ने स्पष्ट कर दिया है कि कंपनियों को दी गई यह विशेष छूट तब तक मासिक आधार पर जारी रहेगी, जब तक आयोग की ओर से इस संबंध में कोई अगला नया आदेश जारी नहीं किया जाता।
एक नजर में मुख्य बातें
- सब्सिडी पाने वालों को राहत, बाकी उपभोक्ताओं पर बढ़े बिल का बोझ।
- टाटा पावर 16 प्रतिशत, बीआरपीएल 17.94 प्रतिशत और बीवाईपीएल 17.43 प्रतिशत सरचार्ज वसूल सकेंगी।
- कोयले के आयात और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी से बढ़ी उत्पादन लागत।
- 10 प्रतिशत की पुरानी अधिकतम सीमा पूरी तरह समाप्त।
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