ईरान के साथ छिड़े संघर्ष के दौरान अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के भालू गांव निवासी 23 वर्षीय मर्चेंट नेवी कैडेट आदित्य शर्मा की मौत के बाद पूरे गांव में गहरा शोक छाया हुआ है। परिजन अपने बेटे के पार्थिव शरीर के घर पहुंचने की राह बेसब्री से देख रहे हैं। घर में मातम पसरा है और माता-पिता, दादी समेत बाकी रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पिता का खुलासा: हमले के बाद जीवित था आदित्य
आदित्य के पिता राजेश शर्मा ने बताया कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक उनके बेटे का शव फिलहाल जहाज पर ही था और उसे पोस्टमार्टम के लिए किसी दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआती सूचना के अनुसार आदित्य के सिर में गंभीर चोट लगी थी।
राजेश शर्मा के अनुसार मस्कट स्थित दूतावास से आए एक फोन कॉल में उन्हें बताया गया कि मिसाइल हमले के बाद आदित्य जिंदा था और उसके सिर में चोट थी। इसके बाद उसे उसके जहाज से दूसरे कार्गो में पहुंचाया गया और इलाज भी दिया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई। अब उसका शव मस्कट के दूतावास में रखा गया है। परिवार को अब भी पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने का इंतजार है।
परिवार ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
आदित्य के चाचा हिमांशु शर्मा ने बताया कि उनकी डीजी शिपिंग के अधिकारियों से टेलीफोन पर बातचीत हुई है। अधिकारियों ने हादसे पर दुख जताते हुए मामले की हर पहलू से जांच कराने का भरोसा दिलाया है।
हिमांशु शर्मा ने कई सवाल खड़े करते हुए कहा कि कंपनी का दावा है कि जहाज एक ही स्थान पर खड़ा था, जबकि आदित्य ने अपने पिता को बताया था कि जहाज ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस इलाके में जहाज चल रहा था, वहां सुरक्षा की दृष्टि से गार्ड तैनात किए जाने चाहिए थे, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में समुद्री लुटेरों या युद्ध जैसी परिस्थितियों का खतरा हमेशा बना रहता है। उनका कहना है कि कंपनी की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हिमांशु शर्मा ने यह भी बताया कि डीजी शिपिंग ने परिवार को आश्वासन दिया है कि आदित्य की मौत से जुड़े सभी तथ्यों की गहन जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके और परिवार को न्याय मिल सके।
इकलौते बेटे को खोने का दर्द
भालू गांव समेत आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग परिवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंच रहे हैं। परिवार की निगाहें अब उस पल पर टिकी हैं, जब आदित्य का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई के लिए घर लाया जाएगा।
आदित्य अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता जालंधर में कारोबार करते हैं और आदित्य की पढ़ाई भी वहीं हुई थी। उसने करीब आठ महीने पहले ही नौकरी ज्वाइन की थी। आदित्य के चाचा संजीव लखनपाल ने बताया कि जब आदित्य के बारे में पता चला तो उन्हें गहरा दुख पहुंचा। परिजनों ने बताया कि आदित्य जल्द ही घर आने वाला था। उसके दादा अशोक कुमार ने बताया कि उनका एक ही पोता था। चचेरे भाई सुरेश शर्मा ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उनके भाई का शव भारत लाया जाए।
हमले में तीन भारतीयों की मौत
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के दौरान ओमान तट के पास अमेरिका ने Settebello जहाज पर मिसाइल से हमला किया था। इस जहाज पर कुल 24 लोग सवार थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया था। हालांकि नादौन के भालू गांव निवासी आदित्य समेत तीन भारतीयों की इस हमले में मौत हो गई। आदित्य शर्मा ने नवंबर 2025 में ही मर्चेंट नेवी ज्वाइन की थी।
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