ममता बनर्जी की कविता 'एपांग ओपांग झपांग' लाइब्रेरी से क्यों हटाई जाएगी? जानिए असली वजह

पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने पब्लिक लाइब्रेरी से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की किताबें हटाने का फैसला किया है, जिनमें उनकी चर्चित कविता 'एपांग ओपांग झपांग' भी शामिल है। सरकार का कहना है कि शिक्षा या चरित्र-निर्माण से जुड़ी न होने वाली रचनाओं को लाइब्रेरी में जगह नहीं दी जाएगी।

पश्चिम बंगाल की पब्लिक लाइब्रेरी में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य की नई सरकार ने तय किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी किताबें लाइब्रेरी से हटाई जाएंगी। इनमें उनकी मशहूर कविता 'एपांग ओपांग झपांग' भी शामिल है। अधिकारियों का तर्क है कि जिन रचनाओं में शिक्षा या चरित्र-निर्माण की कोई उपयोगिता नहीं है, उन्हें अब लाइब्रेरी में नहीं रखा जाएगा।

90 किताबें खरीदने की बाध्यता खत्म

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लाइब्रेरी में अब रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद जैसी महान हस्तियों की रचनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यह नया रुख सीधे तौर पर जून, 2025 के उस आदेश को निरस्त करता है, जिसके तहत स्कूलों के लिए ममता बनर्जी की लिखी लगभग 90 किताबें खरीदना अनिवार्य कर दिया गया था।

गैर-जरूरी किताबें हटाने का फैसला

इस विषय पर लाइब्रेरी मंत्री गौरी शंकर घोष ने कहा कि पिछली सरकार ने तानाशाही ढंग से शासन चलाया, इसी वजह से ममता बनर्जी की लिखी किताबों को लाइब्रेरी में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार आने के बाद ऐसी सभी गैर-जरूरी किताबें हटा दी जाएंगी।

क्या है 'एपांग ओपांग झपांग'?

'एपांग ओपांग झपांग' पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी एक चर्चित कविता है। उनकी कविताओं का संग्रह 'कविता बिटान' के नाम से प्रकाशित हुआ था, जिसका अर्थ 'कविताओं का बगीचा' होता है।

150 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं ममता

उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी अब तक 150 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं। उन्होंने अपनी पहली किताब 'उपलब्धि' 1995 में लिखी थी। उनकी प्रमुख रचनाओं में Trinamul Stare Trinamuler Joy, कबिता बिटान, गुलदस्ता-ए-शायरी, Sishumon और दुआरे सरकार शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने आमार जंगल, आमार पहाड़, अजब छड़ा, Singur Joyee, Banglar Kanyashree और सहिसुष्णता जैसी कई किताबें भी लिखी हैं। ममता बनर्जी की कई रचनाएं अंग्रेजी, उर्दू और अन्य भाषाओं में भी अनूदित हो चुकी हैं।

सत्ता गंवाने के बाद एक और झटका

गौरतलब है कि ममता बनर्जी 15 साल बाद सत्ता से बाहर हुई हैं। इस समय उनके सामने अपनी पार्टी TMC को बचाए रखने की भी बड़ी चुनौती है। उनके अधिकतर सांसद और विधायक बागी रुख अपना चुके हैं। ऐसे हालात में लाइब्रेरी से उनकी किताबें हटाया जाना उनके लिए इस संकट के बीच एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।

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