बंगाल में इन दिनों जो कुछ घट रहा है, उसने ममता बनर्जी की नींद उड़ा दी है। उनके बेहद करीबी माने जाने वाले लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने खुली चेतावनी दे दी है कि ममता को अब अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनमें से किसी एक को चुनना होगा। उनका कहना है कि अगर भतीजा पार्टी में बना रहा, तो वह खुद पार्टी छोड़ देंगे। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता, 80 साल के सौगत रॉय ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि ममता से मिलना तो दूर, अब उनसे बात होना भी मुश्किल हो गया है, ऐसे में पार्टी आखिर कैसे चलेगी। इसी बीच तृणमूल नेताओं पर एक बार फिर अंडों की बौछार हुई, एक TMC नेता के स्कूल से करोड़ों रुपए नकद बरामद हुए और जहांगीर खान की पुलिस ने सड़कों पर परेड कराई।
बंगाल से सामने आ रही ये तस्वीरें ममता के लिए किसी सदमे से कम नहीं हैं। अब यह साफ हो चुका है कि तृणमूल कांग्रेस पर जो लोगों को डराने-धमकाने, जबरन वसूली, तोलाबाजी टैक्स, कट मनी और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे, वे बेबुनियाद नहीं थे। एक के बाद एक सबूत सामने आ रहे हैं और जैसे-जैसे तृणमूल के नेता पकड़े जा रहे हैं, उनके खिलाफ जनता का गुस्सा फूट रहा है। पर असली सवाल यह है कि आखिर ये हालात बने कैसे और ममता बनर्जी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस तरह की हरकतों की छूट क्यों दी।
तृणमूल के संकट की जड़ कौन?
जब यही सवाल पार्टी के बड़े नेताओं से पूछा जाता है, तो जवाब हर बार एक ही मिलता है—इन सब की जड़ अभिषेक बनर्जी हैं। पार्टी में सिर्फ भतीजे की चलती थी और अभिषेक किसी को कुछ नहीं समझते थे। पिछले 30 दिनों से जो कल्याण बनर्जी चिल्ला-चिल्लाकर ममता का बचाव कर रहे थे, अब उनकी बात सुनकर अंदाजा होता है कि नुकसान कितना बड़ा हो चुका है। 80 में से 64 विधायक और लोकसभा के 19 सांसद साथ छोड़ चुके हैं, और हर कोई इस बर्बादी के लिए अभिषेक को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। खास बात यह है कि किसी ने भी ममता बनर्जी पर आरोप नहीं लगाया।
सबका कहना एक ही है—अभिषेक ने लूट मचाई, गुंडों की फौज खड़ी की और चुनावों में टिकट बेचे, मगर डर के मारे कोई कुछ नहीं बोलता था। पार्टी के भीतर बोलने पर निकाल दिए जाने का खतरा था और बाहर बोलने पर केस का। अब वह डर टूट गया है और दरवाजा खुल गया है। ममता की खून-पसीने से खड़ी की गई TMC बिखरने लगी है, फिर भी अभिषेक बनर्जी का अहंकार जरा भी कम नहीं हुआ। लोगों को बस एक ही बात परेशान कर रही है कि बुआ का भतीजे से इतना मोह आखिर क्यों है। ऐसा क्या रहस्य है कि ममता अपनी पार्टी को तबाह होते तो देख सकती हैं, पर अभिषेक को नहीं छोड़ सकतीं।
राजस्थान: कांग्रेस सचिन को कमान क्यों सौंपना चाहती है?
राजस्थान में राजेश पायलट की पुण्यतिथि के मौके पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच एक बार फिर जुबानी जंग छिड़ गई। गहलोत बार-बार यह याद दिला रहे हैं कि 2020 में सचिन पायलट ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश की थी, पार्टी आला कमान के खिलाफ बगावत की थी और उस मुश्किल वक्त में उन्होंने ही कांग्रेस का झंडा मजबूती से थामे रखा था। गहलोत ने सचिन को अपने बेटे जैसा बताते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि सचिन आगे बढ़ें, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि उन्हें राजनीति में अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।
इसके जवाब में सचिन पायलट ने कहा कि गहलोत जी बड़े हैं, बुजुर्ग हैं और उन्हें अपना बेटा बताते हैं, यह अच्छी बात है, मगर सिर्फ बेटा कह देने से क्या होगा। उनका कहना था कि गहलोत जी अगर व्यक्तिगत दुश्मनी भुलाकर बड़प्पन दिखाएं, तभी कांग्रेस का भला होगा। सचिन ने संयमित भाषा में गहलोत पर तीखा कटाक्ष किया, जिस पर गहलोत फिर सामने आए और सफाई देते हुए बोले कि वह सचिन को नीचा नहीं दिखाना चाहते थे, बस सच सामने रखना चाहते थे, और अब उनका मकसद पूरा हो गया, इसलिए बात यहीं खत्म।
अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की यह तकरार पुरानी है। चार साल पहले, सितंबर 2022 में आला कमान ने गहलोत को हटाकर पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था और गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर दिल्ली लाने की योजना थी, मगर ऐन मौके पर विधायक बैठक में नहीं पहुंचे और पूरी योजना धरी रह गई। गहलोत अब कह रहे हैं कि बगावत उन्होंने नहीं कराई थी, बल्कि विधायक खुद सचिन के खिलाफ थे। लेकिन यह सभी जानते हैं कि जो विधायक उस बैठक में नहीं आए थे, वे गहलोत के ही समर्थक थे।
यह मामला अब इसलिए दोबारा गरमा गया है क्योंकि कांग्रेस राजस्थान की कमान सचिन पायलट के हाथ में सौंपना चाहती है। जाहिर है, यह फैसला गहलोत को बिल्कुल रास नहीं आएगा, इसीलिए वह बार-बार याद दिला रहे हैं कि प्रदेश के स्थानीय नेता सचिन को पसंद नहीं करते। मगर यह भी सच है कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सचिन ने बेहतरीन काम किया था। सचिन, राजेश पायलट के बेटे हैं, जिनका 11 जून, 2000 को एक सड़क हादसे में निधन हो गया था। राजेश पायलट बेहद हिम्मती नेता थे और यही खूबी सचिन पायलट में भी कूट-कूटकर भरी है। वह राजस्थान के लिए एक अच्छे नेता साबित होंगे।
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