घर पर तैयार करें मिथिला की खास हरी मिर्च का देसी अचार, झटपट बनकर महीनों चलेगा बेस्वाद हुए बिना

मिथिला की रसोई की पहचान बनी पतली हरी मिर्च का यह देसी अचार तीखेपन, खटास और मसालों की खुशबू से भरपूर है। जानिए इसे घर पर बनाने की आसान विधि, जिससे यह महीनों तक खराब नहीं होगा।

हरी मिर्च का देसी अचार किसी भी साधारण भोजन को कई गुना स्वादिष्ट बना देता है। दाल-चावल, रोटी, पराठा या खिचड़ी के साथ इसकी थोड़ी सी मात्रा भी थाली का स्वाद बदल देती है। जिन लोगों को खाने के साथ कच्ची मिर्च पसंद है, उनके लिए यह अचार एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें हरी मिर्च का तीखापन, नींबू की खटास और देसी मसालों की महक एक साथ घुलकर इसे खास पहचान देती है।

अचार बनाने का सबसे अच्छा मौसम

इन दिनों अचार बनाने के लिए सबसे उपयुक्त समय चल रहा है। तेज धूप और कम नमी के चलते इस मौसम में बनाया गया अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। यही वजह है कि मिथिला क्षेत्र के घरों में इन दिनों अचार बनाने की तैयारी पूरे जोर पर है। यहां हर घर के अचार की अपनी अलग पहचान और स्वाद होता है। आम, नींबू और लहसुन के अचार के बाद अब बारी है मिथिला की पसंदीदा पतली हरी मिर्च के अचार की, जो अपने तीखेपन, खट्टेपन और मसालों की खुशबू के लिए खास माना जाता है।

मिथिला की गृहिणी आशा देवी बताती हैं कि यह अचार खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है। थाली में दाल-चावल, रोटी, पराठा या खिचड़ी के साथ थोड़ा सा हरी मिर्च का अचार परोस दिया जाए, तो साधारण भोजन भी बेहद स्वादिष्ट लगने लगता है। खासकर जो लोग खाने के साथ कच्ची मिर्च खाना पसंद करते हैं, उनके लिए यह बेहतरीन विकल्प साबित होता है, क्योंकि इसमें कच्ची मिर्च का तीखापन, नींबू की खटास और देसी मसालों का स्वाद एक साथ मिलता है।

मिर्च की तैयारी

सबसे पहले बाजार से ताजी और कुरकुरी हरी मिर्च खरीदकर लाएं। मिर्च को साफ पानी से दो से तीन बार अच्छी तरह धो लें और इसके बाद पंखे के नीचे या किसी साफ जगह पर पूरी तरह सुखा लें। अचार बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि मिर्च में पानी की एक बूंद भी न रहे, क्योंकि नमी रहने से अचार खराब हो सकता है। मिर्च सूख जाने पर उसे चाकू की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। एक मिर्च के तीन से चार टुकड़े किए जा सकते हैं।

नींबू और मसालों का मेल

अब कटी हुई मिर्च में प्रति किलो मिर्च के हिसाब से चार से पांच नींबू का रस मिलाएं। इसके बाद स्वादानुसार हल्दी और पर्याप्त मात्रा में नमक डालें। नमक अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है, इसलिए इसकी मात्रा संतुलित रखें।

इसके बाद मसाले तैयार करें। पांच से छह सूखी लाल मिर्च और एक चम्मच पंचफोरन (मेथी, सौंफ, कलौंजी, जीरा और सरसों) को तवे पर हल्का भून लें। ठंडा होने के बाद इसे दरदरा पीसकर मिर्च में मिला दें।

तेल मिलाकर भरें बरनी में

अब सरसों के तेल को कड़ाही में अच्छी तरह गर्म करें। जब तेल से धुआं निकलने लगे तो उसे ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद तेल को मिर्च और मसालों के मिश्रण में डालकर अच्छी तरह मिला लें। तैयार मिश्रण को कांच की साफ और सूखी बरनी में भर दें। इसके बाद बरनी को लगातार दो से तीन दिन तक धूप में रखें और रोजाना एक बार साफ चम्मच से अचार को चलाते रहें। तीन दिन बाद स्वादिष्ट और तीखा-खट्टा हरी मिर्च का अचार तैयार हो जाएगा।

सालभर बरकरार रहता है स्वाद

मिथिला के घरों में यह अचार महीनों तक इस्तेमाल किया जाता है। दाल-चावल, पराठा, पूड़ी या खिचड़ी के साथ इसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है। आशा देवी के मुताबिक, अचार बनाने में थोड़ी मेहनत जरूर लगती है, लेकिन इसका स्वाद ऐसा होता है कि बार-बार खाने का मन करता है। यही वजह है कि यह देसी अचार आज भी मिथिला की रसोई का अहम हिस्सा बना हुआ है।

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