पाकिस्तान एक बार फिर चीन के सहारे अपनी समुद्री ताकत बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। चीन में तैयार की गई पहली हंगोर-क्लास पनडुब्बी गुरुवार को कराची बंदरगाह पहुंच गई। पाकिस्तानी नौसेना इसे अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम का अहम पड़ाव बता रही है, लेकिन यह घटनाक्रम यह भी जाहिर करता है कि इस्लामाबाद की सैन्य क्षमताएं बढ़ाने में बीजिंग की पकड़ कितनी मजबूत हो चुकी है।
कराची नौसैनिक अड्डे पर पनडुब्बी के पहुंचने पर भव्य स्वागत समारोह रखा गया। इस मौके पर पाकिस्तान फ्लीट के कमांडर वाइस एडमिरल अब्दुल मुनीब मौजूद रहे। नौसेना के कैडेट्स ने औपचारिक सलामी दी और हेलीकॉप्टरों ने फ्लाई-पास्ट भी किया।
क्या पाकिस्तान अब भारत को चुनौती दे सकता है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महज एक पनडुब्बी मिल जाने से पाकिस्तान समुद्र में भारत के सामने टिकने की स्थिति में आ गया है? इसका जवाब एक शब्द में है- बिल्कुल नहीं। हंगोर-क्लास पनडुब्बी पाकिस्तान की क्षमता में कुछ इजाफा जरूर करेगी, लेकिन भारतीय नौसेना की समग्र ताकत, तकनीक, अनुभव और परमाणु क्षमता के मुकाबले पाकिस्तान बहुत पीछे है।
क्या है हंगोर-क्लास की खूबी?
हंगोर-क्लास दरअसल चीन की टाइप-039A डिजाइन पर आधारित डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है। इसमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक लगी है, जिसकी बदौलत यह लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती है और दुश्मन की निगाहों से बची रह सकती है।
पाकिस्तान को कुल 8 हंगोर-क्लास पनडुब्बियां मिलनी हैं। इनमें से 4 का निर्माण चीन में हो रहा है, जबकि बाकी 4 का निर्माण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत कराची शिपयार्ड में किया जा रहा है।
भारत के पास कितनी मजबूती है?
भारत के बेड़े में सिर्फ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां ही नहीं, बल्कि परमाणु ऊर्जा से चलने वाली रणनीतिक पनडुब्बियां भी शामिल हैं, जो इसे एक अलग स्तर पर खड़ा करती हैं।
अरिहंत क्लास
इसका पाकिस्तान के पास कोई जवाब नहीं है। यह भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली यह बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे बार-बार सतह पर आने की जरूरत नहीं पड़ती। यह महीनों तक समुद्र की गहराइयों में छिपी रह सकती है और जरूरत पड़ने पर परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें दाग सकती है। यानी जहां हंगोर-क्लास सिर्फ एक अटैक सबमरीन है, वहीं अरिहंत भारत की रणनीतिक परमाणु ताकत का अहम हिस्सा है। इस स्तर पर पाकिस्तान की कोई पनडुब्बी मुकाबले में नहीं ठहरती।
कलवरी क्लास भी किसी से कम नहीं
भारत की कलवरी क्लास (स्कॉर्पीन) पनडुब्बियां दुनिया की सबसे शांत और आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों में गिनी जाती हैं। इनमें फ्रांसीसी तकनीक, आधुनिक सेंसर, एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम और भारतीय जरूरतों के अनुरूप कई बदलाव शामिल हैं। नौसैनिक विशेषज्ञ मानते हैं कि सेंसर और ऑपरेशनल अनुभव के मामले में कलवरी क्लास हंगोर-क्लास को कड़ी टक्कर देती है और कई मोर्चों पर उससे आगे भी मानी जाती है।
संख्या के लिहाज से भी भारत आगे
केवल तकनीक ही नहीं, कुल समुद्री ताकत में भी भारत का पलड़ा भारी है। भारतीय नौसेना के पास विमानवाहक पोत, परमाणु पनडुब्बियां, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और लंबी दूरी की मिसाइलों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। इसके उलट पाकिस्तानी नौसेना लगातार चीन पर निर्भर होती जा रही है।
भारत प्रोजेक्ट-75I और स्वदेशी न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN) कार्यक्रम पर भी काम कर रहा है। ये परियोजनाएं पूरी होने के बाद भारतीय नौसेना की पानी के नीचे मारक क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी।
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