गर्मियों के इस मौसम में अगर आपके खीरे की बेल की पत्तियां नीचे की तरफ झुक रही हैं या सफेद पड़ने लगी हैं, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा करने की भूल बिल्कुल न करें। ज्यादातर किसान इसे तेज गर्मी या चिलचिलाती धूप का असर समझ लेते हैं, जबकि असल में यह किसी मौसमी मार का नहीं, बल्कि फसल में पनप रहे गंभीर कीटों और रोगों का शुरुआती संकेत होता है। यह दिक्कत खीरे की पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है और उत्पादन में भारी गिरावट ला सकती है। ऐसे में समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपचार करना बेहद जरूरी है।
कृषि एक्सपर्ट डॉ. विमल कुमार ने बताया कि इस समय खीरे की फसल में थ्रिप्स और सफेद मक्खी यानी व्हाइट फ्लाई जैसे रसचूसक कीटों का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। जब खीरे की पहली तुड़ाई के बाद दूसरी फलत आने वाली होती है, तब पौधों के तने और पत्तियां काफी मुलायम हो जाती हैं। ये कीट इसी कोमल अवस्था का फायदा उठाकर पत्तियों का पूरा रस चूस लेते हैं, जिससे पत्तियां नीचे की ओर लटकने या झुकने लगती हैं। इसके साथ ही इस मौसम में ब्लाइट यानी झुलसा रोग का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसमें पत्तियां सफेद होने लगती हैं और तना नीचे से काला पड़ने लगता है।
रसचूसक कीटों का हमला और उनके लक्षण
खीरे की पत्तियों का नीचे की ओर झुकना मुख्य रूप से थ्रिप्स और सफेद मक्खी के आक्रमण को दर्शाता है। ये छोटे कीट पत्तियों के निचले हिस्से में जमा होकर उनका जरूरी पोषक रस चूस लेते हैं। रस खत्म होते ही पत्तियां अपनी ताकत खो देती हैं और नीचे की तरफ मुड़ जाती हैं। इससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है, जिसके चलते पौधों का विकास पूरी तरह रुक जाता है और फल आना बंद हो जाते हैं।
रासायनिक नियंत्रण और सही दवाएं
इन रसचूसक कीटों से फसल को बचाने के लिए किसानों को दवाओं का उचित छिड़काव करना चाहिए। डॉ. विमल कुमार के अनुसार इसके निदान के लिए इमिडाक्लोप्रिड (17.8% SL) की 10 एमएल मात्रा या फिर थायोमेथॉक्साम की 5 ग्राम मात्रा को 15 लीटर पानी की टंकी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। ध्यान रहे कि एक ही दवा को बार-बार न दोहराएं। अगर पहली बार थायोमेथॉक्साम का इस्तेमाल किया है, तो अगली बार इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग करें।
ब्लाइट की पहचान और नुकसान
कीटों के अलावा खीरे की बेलों में ब्लाइट यानी झुलसा रोग भी तेजी से फैलता है। इस बीमारी के लगने पर खीरे की पत्तियां धीरे-धीरे पूरी तरह सफेद होने लगती हैं और पौधे का मुख्य तना नीचे की ओर से काला पड़ना शुरू हो जाता है। अगर शुरुआती चरण में ही इस पर ध्यान न दिया जाए, तो पूरी की पूरी बेल सड़कर सूख जाती है।
झुलसा रोग का अचूक उपचार
ब्लाइट के सफल नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को सबसे प्रभावी और अचूक दवा माना जाता है। किसान 50 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 15 लीटर पानी की टंकी में अच्छी तरह घोलकर फसल पर छिड़काव करें। रोग को पूरी तरह खत्म करने के लिए 15-15 दिनों के अंतराल पर इस छिड़काव को कम से कम दो बार जरूर दोहराएं, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी।
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