नागौर जिले में मानसून जल्द ही दस्तक देने को तैयार है। प्री-मानसून की बारिश के बाद किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस इलाके में बाजरा प्रमुख फसल है, इसलिए किसान अभी से इसकी खेती की तैयारी में जुट गए हैं।
बुवाई का सही समय और नमी का महत्व
कृषि विशेषज्ञ पन्ना लाल के अनुसार नागौर समेत कम वर्षा वाले जिलों में बाजरे की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक की जाती है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में खेत को पर्याप्त नमी मिलती है, जिससे बीजों का अंकुरण अच्छा होता है और फसल की बढ़वार भी बेहतर रहती है।
उन्नत किस्मों का चयन करें
अधिक पैदावार के लिए किसानों को प्रमाणित और उन्नत किस्मों के बीज ही चुनने चाहिए। नागौर की जलवायु और भूमि के लिहाज से आरएचबी-177, आरएचबी-173, एचएचबी-67 इम्प्रूव्ड तथा एमपीएमएच-17 जैसी किस्में उपयुक्त मानी जाती हैं। इन किस्मों में सूखा सहने की क्षमता अधिक होती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है।
जलभराव से बढ़ सकता है नुकसान
बाजरे की बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए। साथ ही खेत में बारिश का पानी रुकने नहीं देना चाहिए, क्योंकि जलभराव से पौधों की जड़ें प्रभावित होती हैं और रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक और जैव उर्वरकों से उपचारित करना भी जरूरी है, ताकि शुरुआती रोगों और कीटों से बचाव हो सके।
कतार पद्धति से करें बुवाई
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बाजरे की बुवाई कतार पद्धति से करनी चाहिए। कतार से कतार की दूरी लगभग 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखना उपयुक्त माना जाता है। इससे पौधों को पर्याप्त पोषण, प्रकाश और हवा मिलती है तथा निराई-गुड़ाई में भी आसानी रहती है।
संतुलित उर्वरक प्रबंधन
खेत की मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा देना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा फसल की बढ़वार के दौरान आवश्यकता के अनुसार नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग करने से उत्पादन बढ़ता है।
खरपतवार और कीट नियंत्रण पर रखें नजर
किसानों को खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करने से खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। साथ ही फसल में तना मक्खी, माहू और अन्य कीटों की नियमित निगरानी करते रहना जरूरी है। समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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