ताइवान पर चीन से तकरार, फिर भी ड्रैगन के देश में पढ़ रहा जापानी पीएम का पोता — क्या है यह दोहरा रवैया?

जापानी प्रधानमंत्री सनाई ताकाइची ताइवान का खुलकर समर्थन करती हैं, मगर उनके 19 वर्षीय सौतेले पोते रेन् यामामोटो ने चीन की एक शीर्ष यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया है, जिससे जापान में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

जापान की प्रधानमंत्री सनाई ताकाइची इन दिनों एक नए विवाद में घिर गई हैं। उनके 19 वर्षीय सौतेले पोते रेन् यामामोटो ने चीन की एक प्रमुख यूनिवर्सिटी में प्रवेश ले लिया है। यह घटना ऐसे वक्त सामने आई है, जब टोक्यो और बीजिंग के बीच रिश्ते बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। चूंकि ताकाइची हमेशा ताइवान के पक्ष में खड़ी रही हैं, इसलिए उनके पोते का चीन जाकर पढ़ाई करना लोगों को रास नहीं आ रहा और सोशल मीडिया पर उनका जमकर विरोध हो रहा है।

पीएम के परिवार का मामला कैसे बना अंतरराष्ट्रीय सुर्खी

प्रधानमंत्री सनाई ताकाइची के घर का यह मसला अब अंतरराष्ट्रीय खबर बन चुका है। उनके 19 साल के सौतेले पोते रेन् यामामोटो ने इस वर्ष अप्रैल में चीन की एक टॉप यूनिवर्सिटी के चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला लिया है। रेन्, पीएम ताकाइची के सौतेले बेटे केन यामामोटो के बेटे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पोते के चीन जाने की जानकारी ताकाइची को बिल्कुल अंतिम समय पर मिली। वह इस निर्णय से बेहद नाराज थीं, लेकिन अपने पोते को रोक नहीं सकीं। अब इसी फैसले की वजह से जापान में उनका विरोध तेज हो गया है।

आखिर इतना बड़ा विवाद क्यों

जापान और चीन के संबंध फिलहाल अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री के परिवार के किसी सदस्य का चीन जाना लोगों को चौंका रहा है। चीनी सरकारी मीडिया ने भी ताकाइची को पाखंडी करार दिया है। जापानी मीडिया में खबर आते ही हंगामा खड़ा हो गया। जनता का कहना है कि जो प्रधानमंत्री लगातार चीन का विरोध करती हैं, उनका पोता आखिर वहीं पढ़ने क्यों गया। ताकाइची इस फैसले को पलट तो नहीं सकीं, मगर इससे उनकी राजनीतिक छवि को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

ताइवान पर बयान के बाद चीन की सख्ती

पिछले साल नवंबर में ताकाइची ने ताइवान को लेकर एक अहम बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान सैन्य कार्रवाई कर सकता है। बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, इसलिए इस बयान के बाद उसने जापान पर कई प्रतिबंध थोप दिए।

चीन ने जापानी सीफूड के आयात पर रोक लगा दी और कई अहम तकनीकों के निर्यात पर भी पाबंदी लगा दी। साथ ही उसने जापान पर दोबारा सैन्य ताकत बढ़ाने का आरोप मढ़ा। जवाब में जापान ने भी अपने रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी की है।

सोशल मीडिया पर भड़की जनता

इस खबर के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। एक यूजर ने लिखा, ‘उसे वहां क्यों भेजा गया, उसे तो ताइवान भेजना चाहिए था।’ एक अन्य व्यक्ति ने तंज कसते हुए कहा, ‘मंच पर चीन का विरोध और परिवार की मार्कशीट पर चीन।’

हालांकि कुछ लोगों ने ताकाइची का बचाव भी किया। उनका कहना था, ‘तो इसमें क्या हुआ, कई चीनी अधिकारियों के बच्चे भी पश्चिमी देशों की टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं।’ इस तरह इंटरनेट पर एक लंबी बहस छिड़ गई है।

ग्लोबल सप्लाई चेन और कारोबार पर असर

इस विवाद के चलते चीन ने जापान को रेयर अर्थ मिनरल्स का निर्यात रोक दिया है। दिसंबर से डिस्प्रोसियम और गैलियम जैसे जरूरी मेटल्स की आपूर्ति बंद है। चीन ने मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों को भी निशाना बनाया है, जिससे जापानी मैन्युफैक्चरिंग पर बुरा असर पड़ रहा है।

अमेरिका ने भी चीन से रेयर अर्थ की आपूर्ति दोबारा शुरू करने की अपील की है। दुनिया को आशंका है कि इस टकराव से ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

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