एरावन 'ब्रह्मा' मंदिर बम धमाके में दो उइगर मुसलमानों को मौत की सजा, हादसे में गई थी 20 लोगों की जान

बैंकॉक के प्रसिद्ध एरावन मंदिर में 2015 में हुए बम धमाके के मामले में थाई अदालत ने चीन के उइगर समुदाय के दो लोगों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। इस धमाके में 20 लोग मारे गए थे और 120 से ज्यादा घायल हुए थे।

बैंकॉक: थाईलैंड की एक अदालत ने वर्ष 2015 में राजधानी बैंकॉक के मशहूर एरावन मंदिर में हुए बम धमाके के मामले में चीन के उइगर मुस्लिम समुदाय से जुड़े दो लोगों को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। इस धमाके में 20 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 120 से अधिक लोग घायल हुए थे। गौरतलब है कि बैंकॉक स्थित एरावन मंदिर हिंदू देवता ब्रह्मा को समर्पित है और यहां चीन से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। दोषी ठहराए गए दोनों लोगों की पहचान युसुफु मियराइली और बिलाल मोहम्मद के रूप में हुई है।

धमाके के थोड़ी देर बाद ही पकड़े गए थे दोनों

रिपोर्ट्स के अनुसार, 17 अगस्त 2015 को हुए इस धमाके के कुछ ही समय बाद युसुफु और बिलाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत में इन दोनों पर हत्या, हत्या के प्रयास और विस्फोटक सामग्री के अवैध कब्जे सहित कई संगीन आरोप दर्ज किए गए थे। जांच एजेंसियों ने दावा किया कि वीडियो फुटेज, फिंगरप्रिंट और दूसरे सबूतों के आधार पर दोनों का इस धमाके से सीधा संबंध साबित हो गया। बैंकॉक साउथ क्रिमिनल कोर्ट में चार जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त और ठोस प्रमाण मौजूद हैं।

आरोपी ने खुद को बताया निर्दोष

अदालत ने यह भी कहा कि दोनों आरोपी अपने बचाव में कोई ऐसा मजबूत सबूत पेश नहीं कर सके, जिसके आधार पर उन पर लगे आरोप खारिज किए जा सकें। फैसला आने के बाद युसुफु मियराइली ने टूटी-फूटी थाई भाषा में खुद को बेगुनाह बताया। उसने कहा, 'मैं इस फैसले को नहीं मानता। मैं निर्दोष हूं। मुझे न्याय नहीं मिला है। मैं थाईलैंड के लोगों से मेरी मदद करने की गुजारिश करता हूं।' मियराइली के वकील के मुताबिक, उसने हिरासत के दौरान थाई भाषा सीखी थी और वह अंग्रेजी भी बोल लेता है।

भाषा की दिक्कत से कई बार टली सुनवाई

सुनवाई के दौरान युसुफु ने सह-आरोपी बिलाल मोहम्मद के लिए उइगर भाषा में अनुवाद का काम भी किया, क्योंकि अदालत में सिर्फ अंग्रेजी का दुभाषिया मौजूद था। उपयुक्त अनुवादकों के अभाव में मुकदमे की सुनवाई कई बार स्थगित करनी पड़ी थी। बचाव पक्ष के वकील चुचार्ट कानपाई ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे, क्योंकि मामले के कई पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर अपना जुर्म कबूल किया था, मगर 2016 में जब मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई तो उन्होंने खुद को निर्दोष बताया।

सैन्य अदालत से नागरिक अदालत में पहुंचा मामला

शुरुआत में यह मामला सैन्य अदालत में चल रहा था, जिसे 2019 में नागरिक अदालत यानी बैंकॉक साउथ क्रिमिनल कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने जेल में प्रताड़ना और यातना दिए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यातना के इन आरोपों का कोई प्रमाण नहीं मिला और न ही कबूलनामे के लिए जांच अधिकारियों द्वारा दबाव डालने का कोई सबूत सामने आया।

हमले में मारे गए थे 7 चीनी नागरिक

अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि 2015 के इस आतंकी हमले में 20 लोगों की जान गई थी, जिनमें 7 चीनी नागरिक भी शामिल थे, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि अपराधियों ने बेहद अमानवीय और जघन्य कृत्य किया था और चीन कानून के अनुसार मुकदमा चलाकर दोषियों को कड़ी सजा देने के थाईलैंड के प्रयासों का समर्थन करता है।

शुरू में केवल 3 लोग ही हुए थे गिरफ्तार

कई मानवाधिकार संगठनों ने इस मुकदमे की प्रक्रिया और लंबी खिंचती सुनवाई पर सवाल खड़े किए हैं। फ्रांस स्थित इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने वर्ष 2023 में संयुक्त राष्ट्र को एक याचिका सौंपकर आरोप लगाया था कि इस मामले में मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है। संगठन ने गिरफ्तारी के कानूनी आधार और आरोपियों के साथ कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार को लेकर भी चिंता जताई थी। पुलिस जांच के अनुसार, इस धमाके के सिलसिले में कुल 17 संदिग्धों की पहचान की गई थी, लेकिन केवल 3 लोगों को ही गिरफ्तार किया जा सका।

युसुफ ने किया धमाका, बिलाल ने रखा था विस्फोटक

इस मामले में एक थाई महिला पर लगे आरोप पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण 2024 में हटा दिए गए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि युसुफु मियराइली ने बम में विस्फोट किया था, जबकि बिलाल मोहम्मद, जिसे आदेम करादाग के नाम से भी जाना जाता है, ने धमाके से कुछ मिनट पहले विस्फोटक से भरा बैग मंदिर परिसर में रखा था।

आखिर इस धमाके के पीछे की वजह क्या थी?

धमाके के पीछे की मंशा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। थाई अधिकारियों का मानना है कि यह हमला मानव तस्करी से जुड़े किसी गिरोह की बदले की कार्रवाई हो सकता है, क्योंकि 2015 में पुलिस ने मानव तस्करों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था। उसी साल म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी प्रवासियों से जुड़े कई लावारिस कैंप थाईलैंड-मलेशिया सीमा के जंगलों में पाए गए थे।

2025 में 40 उइगर शरणार्थी भेजे गए थे चीन

हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हमला उन उइगर अलगाववादियों की प्रतिक्रिया हो सकता है, जो जुलाई 2015 में थाईलैंड द्वारा कई उइगरों को जबरन चीन वापस भेजे जाने से नाराज थे। बड़ी संख्या में उइगर चीन में कथित दमन और सख्त नियंत्रण से बचने के लिए पेशेवर तस्करों की मदद से देश छोड़ने की कोशिश करते हैं। उल्लेखनीय है कि थाईलैंड ने वर्ष 2025 में भी 40 उइगर शरणार्थियों को चीन वापस भेजा था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई थी।

https://www.indiatv.in/world/asia/thailand-court-sentences-two-uyghur-men-to-death-over-deadly-2015-bangkok-erawan-shrine-bombing-2026-06-11-1224482