भारतीय खेल जगत इन दिनों एक खास बेचैनी से गुजर रहा है और इसकी सबसे बड़ी वजह है राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में लगातार बढ़ता विलंब। देश की खेल उपलब्धियों का यह सालाना उत्सव अब तक घोषित नहीं हो सका है, जबकि चयन समिति ने अपनी सिफारिशें छह महीने पहले ही सौंप दी थीं। खेल मंत्रालय इस देरी के पीछे ‘अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए नामों की दोबारा समीक्षा’ को कारण बता रहा है।
नियम के मुताबिक मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही नामित खिलाड़ियों को आधिकारिक तौर पर पुरस्कार विजेता माना जाता है। मंत्रालय के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि यह लंबा इंतजार प्रक्रिया का ही हिस्सा है और ‘पुरस्कारों की गरिमा कायम रखने’ के लिए जरूरी है। लेकिन यह दलील खिलाड़ियों को राहत देने वाली नहीं है।
खिलाड़ियों का टूटता मनोबल
ओलंपिक पदक जीत चुके एक पूर्व खेल रत्न विजेता ने पीटीआई से बातचीत में निराशा जताते हुए कहा कि अब तक किसी घोषणा का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार यह खिलाड़ियों का हौसला तोड़ने वाला है, खासकर इसलिए क्योंकि अनौपचारिक तौर पर ज्यादातर लोगों को पहले ही पता चल जाता है कि छांटी गई सूची में उनका नाम है या नहीं।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘इन पुरस्कारों के लिए हमेशा एक तय कार्यक्रम का पालन होना चाहिए। जो भी मूल्यांकन करना है वह किया जा सकता है, लेकिन इस तरह नामों को रोककर नहीं। मुझे यकीन है कि चुने गए ज्यादातर लोग इन सम्मानों के हकदार हैं।’’
बदलती तारीख और टूटती परंपरा
राष्ट्रपति भवन में होने वाले इस भव्य समारोह की तारीख लंबे समय से तय नहीं रह गई है। परंपरागत रूप से यह आयोजन 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस पर होता था, जो हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन भी है। मगर 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद से इसकी तारीख स्थिर नहीं रही। उस साल स्वास्थ्य नियमों के चलते समारोह वर्चुअल तरीके से कराया गया था।
ओलंपिक और दूसरी बहु-खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए आयोजन को कई बार 29 अगस्त से कुछ महीने आगे खिसकाया गया। पिछली बार यह समारोह पिछले साल 17 जनवरी को हुआ था। उस आयोजन को एक साल से ज्यादा बीत चुका है और 2025-26 के सम्मान की सिफारिशें दिसंबर 2025 में की गई थीं।
मौजूदा नियमों के अनुसार सूची को अंतिम रूप दिए जाने के एक हफ्ते के भीतर मंत्रालय को इसकी औपचारिक घोषणा करनी थी और जरूरत पड़ने पर मामूली बदलाव की गुंजाइश रखी जा सकती थी। लेकिन हफ्ते बीतकर महीनों में बदल गए हैं और घोषणा कब होगी, इसका कोई पता नहीं। चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अगले सत्र के नामांकन का समय भी अब ज्यादा दूर नहीं रह गया है।
पारदर्शिता की मांग
अर्जुन पुरस्कार पा चुके एक पूर्व खिलाड़ी और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता भी इस राय से सहमत हैं। नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि तारीख कभी बदली ही नहीं जानी चाहिए थी, और अगर मकसद 29 अगस्त को सिर्फ मेजर ध्यानचंद की विरासत के रूप में मनाना था, तो पुरस्कारों के लिए कोई नई स्थायी तारीख तय कर दी जानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, ‘‘शुरू में अलग-अलग वजहों से तारीख बदलती रही और अब पूरी प्रक्रिया ही रुकी हुई है, जिसमें खिलाड़ियों का कोई दोष नहीं है। मंत्रालय को कम से कम कुछ तो स्पष्टीकरण देना चाहिए, क्योंकि ये सम्मान खिलाड़ियों के लिए किसी सालाना महोत्सव जैसे होते हैं। ब्लेजर की फिटिंग, पूरे प्रोटोकॉल की ड्रेस रिहर्सल और आखिर में राष्ट्रपति के साथ वह पल- ये सब खिलाड़ियों के लिए बेहद खास होता है।’’
इन पुरस्कारों से भावनाएं जुड़ी होती हैं और यह बिल्कुल ठीक नहीं कि किस तरह की समीक्षा हो रही है, इसकी कोई जानकारी ही नहीं दी जा रही। थोड़ी पारदर्शिता तो होनी ही चाहिए। अगर 29 अगस्त को समारोह नहीं करना चाहते तो ठीक है, लेकिन कोई ऐसी तारीख तय करें जो आगे चलकर परंपरा बन जाए।
खुले मंच पर भी जताई नाराजगी
इस देरी से सिर्फ पूर्व पुरस्कार विजेता ही नहीं, बल्कि मौजूदा नामित खिलाड़ी भी आहत हैं। दोबारा मूल्यांकन की घोषणा के बाद अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित और एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले डेकाथलन खिलाड़ी तेजस्विन शंकर ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा था कि यह देरी सिर्फ खिलाड़ियों और कोचों का हौसला तोड़ने वाली नहीं, बल्कि अनादर का भी संकेत है।
इस साल अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों में विश्व कप जीतने वाली शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख और जिम्नास्ट प्रणति नायक भी शामिल हैं।
सम्मान, नकद राशि और नामित नाम
देश के सबसे बड़े खेल सम्मान खेल रत्न के साथ एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और 25 लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है। सूत्रों के अनुसार 2025-26 के लिए सिर्फ पुरुष हॉकी टीम के स्टार हार्दिक सिंह का नाम ही इसके लिए नामित किया गया है। वहीं अर्जुन पुरस्कार के लिए 20 से अधिक खिलाड़ियों को नामित किया गया है। अगर सूची में कोई फेरबदल नहीं हुआ, तो योगासन खेल में पहली बार किसी खिलाड़ी को यह पुरस्कार मिलेगा। अर्जुन पुरस्कार विजेता को 15 लाख रुपये दिए जाते हैं।
मंत्रालय की चुप्पी और अंदरूनी चिंताएं
मंत्रालय ने देरी की वजह को लेकर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन अनौपचारिक बातचीत में बड़े अधिकारियों ने कुछ नामित खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर सवाल उठाए हैं कि क्या वे इस सम्मान की जरूरी शर्तों को पूरा करते हैं।
एक अधिकारी ने कहा था, ‘‘ऐसा नहीं होना चाहिए कि हमारे पास हर जगह अर्जुन पुरस्कार विजेता हों, लेकिन जब उनसे उनकी उपलब्धियों के बारे में पूछा जाए तो दिखाने को कुछ खास न हो। साथ ही उन कानूनी मामलों और मीडिया में दिए जाने वाले अजीब बयानों को भी नहीं भूलना चाहिए, जो तब सामने आते हैं जब कुछ लोगों को पुरस्कार नहीं मिलता।’’
https://hindi.news18.com/news/sports/others-national-sports-awards-delay-sparks-concern-among-athletes-selection-list-under-review-10557764.html