किस्मत का क्रूर खेल: मालवीय नगर अग्निकांड में पूरा परिवार गया, अब श्याम अग्रवाल भी नहीं रहे, करोड़ों की संपत्ति का कोई वारिस नहीं

दिल्ली के मालवीय नगर रेस्टोरेंट अग्निकांड में अग्रवाल परिवार के 8 सदस्यों की मौत के बाद अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे आखिरी सदस्य 70 वर्षीय श्याम अग्रवाल ने भी दम तोड़ दिया। अब इस परिवार में न कोई रोने वाला बचा है और न ही करोड़ों की संपत्ति संभालने वाला।

कब किसकी जिंदगी पलट जाए, यह कोई नहीं जानता। किस्मत कभी-कभी ऐसे क्रूर खेल दिखाती है कि देखने वाले भी सिहर उठते हैं। कुछ ही दिन पहले दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग ने पूरे अग्रवाल परिवार को निगल लिया था। अब इस परिवार के सबसे बुजुर्ग और इकलौते बचे सदस्य श्याम अग्रवाल ने भी मैक्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। 70 साल के श्याम अग्रवाल के निधन के साथ ही इस घर का दीया पूरी तरह बुझ गया।

एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत

दक्षिण दिल्ली के फ्लोरिश स्टेज बीएंडबी में लगी इस भयावह आग में एक ही परिवार के 8 लोग जलकर राख हो गए थे। ये सभी अपने घर के सबसे बुजुर्ग श्याम अग्रवाल से मिलने आए थे, जो पास ही मैक्स अस्पताल में भर्ती थे और बीमारी से जूझ रहे थे। परिवार उनके करीब रहने के लिए इसी रेस्टोरेंट में ठहरा था, लेकिन बीच में ही यह हादसा हो गया और सब कुछ खत्म हो गया।

तीन दिन पहले हुए थे अस्पताल में भर्ती

रिपोर्ट के मुताबिक राधे श्याम अग्रवाल सत्तर वर्ष से अधिक उम्र के थे। उन्हें दिल की बीमारी थी और पिछले कुछ दिनों से वे वेंटिलेटर पर थे। आग की घटना से ठीक तीन दिन पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान उनका पूरा परिवार और रिश्तेदार उन्हें देखने के लिए दिल्ली पहुंच गए थे और इसी बीएंडबी में रुके थे।

जिस बीएंडबी में परिवार ठहरा था, वहां 3 जून को अचानक आग लग गई। इस हादसे में कुल 22 लोगों की जान चली गई, जिनमें 13 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।

नहीं दी गई थी हादसे की खबर

अस्पताल में भर्ती राधे श्याम को इस त्रासदी की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उनके परिजनों ने उन्हें यह नहीं बताया कि उनकी पत्नी, इकलौते बेटे विवेक, बहू तरजनी, दो पोतियों और तीन अन्य रिश्तेदारों की आग में मौत हो चुकी है।

एक करीबी रिश्तेदार ने बताया, “हमने उन्हें इस त्रासदी के बारे में कुछ नहीं बताया। अगर बताते तो वे और टूट जाते। हम चाहते थे कि वे ठीक हो जाएं, ताकि परिवार में कम से कम एक सदस्य तो बचा रहे।”

हालांकि यह उम्मीद भी पूरी नहीं हो सकी। यह जाने बिना कि उनके परिवार में अब कोई नहीं बचा है, मंगलवार दोपहर श्याम अग्रवाल ने भी दम तोड़ दिया।

कौन-कौन ठहरा था उस होटल में

इस हादसे में श्याम अग्रवाल के बेटे विवेक अग्रवाल अपनी मां प्रेमलता, पत्नी तरजनी और दो बेटियों जिविशा व वार्या के साथ अस्पताल के पास स्थित इस बीएंडबी में ठहरे थे। उनके साथ विवेक के मामा अशोक गोयल, मौसी कमला और उनके पति जिमरी भी आए हुए थे। पूरा परिवार अस्पताल के करीब रहने के मकसद से ही इस होटल में रुका था।

भतीजे ने किया अंतिम संस्कार

राधे श्याम के निधन के बाद उनके तत्काल परिवार में कोई नहीं बचा। उनका अंतिम संस्कार उनके भतीजे ने किया। यह परिवार मूल रूप से गुरुग्राम का रहने वाला था। रिश्तेदार ने बताया कि अब उनका घर पूरी तरह वीरान हो गया है।

करोड़ों की संपत्ति का कोई वारिस नहीं

रिश्तेदार के मुताबिक परिवार अगले महीने अहमदाबाद में एक शादी में शामिल होने वाला था। सब कुछ खुशी-खुशी चल रहा था, लेकिन पल भर में सब बिखर गया। अब हालत यह है कि इस परिवार में न कोई रोने वाला बचा है और न ही उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति को संभालने वाला। किसी को समझ नहीं आ रहा कि इतनी बड़ी संपत्ति का आखिर क्या किया जाए।

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