दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भयावह अग्निकांड का शिकार बने विवेक अग्रवाल और उनके परिवार की आखिरी जीवित कड़ी भी अब नहीं रही। मैक्स अस्पताल में भर्ती विवेक के पिता राधेशाम अग्रवाल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 75 वर्षीय राधेशाम लंबे समय से लंग्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बेटे और परिवार की दर्दनाक मौत के ठीक 6 दिन बाद उनका भी निधन हो गया।
एक ही हादसे में परिवार के 8 सदस्यों की मौत
बीते बुधवार को दिल्ली के मालवीय नगर में हुए इस अग्निकांड में कुल 21 लोगों की जान गई थी। इस हादसे में गुरुग्राम के रहने वाले विवेक अग्रवाल के परिवार के 8 सदस्यों की भी मौत हो गई थी। मरने वालों में विवेक की मां प्रेमलता अग्रवाल, पत्नी तर्जनी अग्रवाल, बेटियां जीविशा और वर्या अग्रवाल के अलावा विवेक के मौसा, मौसी और मामा शामिल थे।
जानकारी के अनुसार, चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजिनी, मां प्रेमलता तथा बेटियां जीविशा और वारिया समेत परिवार के आठ लोग इस होटल अग्निकांड में अपनी जान गंवा बैठे।
इलाज के लिए दिल्ली आया था परिवार
यह परिवार दिल्ली सिर्फ इसलिए पहुंचा था क्योंकि विवेक के पिता राधेशाम अग्रवाल पास के अस्पताल में भर्ती थे। रिश्तेदारों के मुताबिक, विवेक ने अस्पताल के नजदीक ही होटल में दो कमरे बुक किए थे, ताकि इलाज के दौरान पूरा परिवार वहीं ठहर सके।
लेकिन बीते बुधवार सुबह अचानक भड़की भीषण आग ने सब कुछ खत्म कर दिया। जो लोग पिता के स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे थे, वे खुद काल के गाल में समा गए।
शव इतने जले कि पहचान नहीं पाए रिश्तेदार
इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई शव इतनी बुरी तरह जल चुके थे कि रिश्तेदार उन्हें पहचान तक नहीं पा रहे थे। विवेक की एक बेटी तो हादसे से एक दिन पहले ही बेंगलुरु से अपने दादा से मिलने दिल्ली पहुंची थी। परिवार इस बात से खुश था कि सब एक साथ हैं, मगर कुछ ही घंटों बाद यह परिवार हमेशा के लिए बिखर गया।
अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के बाद किसी तरह 58 लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन 21 लोगों की मौत हो गई।
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