जयपुर के जगतपुरा स्थित नंदपुरी अंडरपास क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के सिलसिले में नूरानी मस्जिद को हटाए जाने के मुद्दे पर विवाद और गहरा गया है। राजस्थान मुस्लिम फोरम ने मस्जिद को अतिक्रमण करार देने वाले दावों को सिरे से खारिज किया है और इसके समर्थन में वर्ष 1981 से जुड़े वैध दस्तावेज सार्वजनिक रूप से पेश किए हैं। फोरम ने मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए अदालत जाने और मस्जिद के दोबारा निर्माण की अनुमति देने की मांग रखी है।
सड़क चौड़ीकरण में हटाए गए मकान और धार्मिक स्थल
प्रशासन ने नंदपुरी अंडरपास इलाके में सड़क को चौड़ा करने के लिए 125 से ज्यादा मकानों और पांच धार्मिक स्थलों को हटा दिया है। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाए जाने के बाद सड़क की चौड़ाई 80 फीट तक बढ़ाई जाएगी, जिससे यातायात व्यवस्था सुधरेगी और लोगों को जाम से राहत मिलेगी।
इस कार्रवाई से पहले जयपुर की एमडी रोड स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाने में राजस्थान मुस्लिम फोरम ने महापंचायत बुलाई थी, जिसमें नूरानी मस्जिद और मजार को हटाने के प्रस्तावित फैसले का विरोध दर्ज किया गया था।
फोरम ने अतिक्रमण के दावों को बताया भ्रामक
मंगलवार को राजस्थान मुस्लिम फोरम ने प्रेस वार्ता आयोजित कर मस्जिद को अतिक्रमण बताने वाले दावों को भ्रामक और तथ्यों के विपरीत करार दिया। फोरम के पदाधिकारियों ने कहा कि मस्जिद से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और इन्हें सबके सामने पेश भी किया गया है। उनका आरोप है कि कुछ लोग सुनियोजित ढंग से इस धार्मिक स्थल को अवैध साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
1981 से अब तक के दस्तावेज सार्वजनिक
फोरम की ओर से बताया गया कि मस्जिद से संबंधित वर्ष 1981 से लेकर अब तक के तमाम अहम दस्तावेज मीडिया और आम लोगों के सामने रखे गए हैं। इनमें जमीन खरीद के कागजात, भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) से जुड़ा रिकॉर्ड, वक्फ बोर्ड के दस्तावेज और पट्टे शामिल हैं। फोरम का दावा है कि इन सबसे साफ हो जाता है कि मस्जिद का अस्तित्व पूरी तरह कानूनी आधार पर है।
न्याय के लिए अदालत का सहारा
फोरम ने कहा कि इस मामले में इंसाफ पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया जा रहा है। साथ ही प्रशासन से उसी स्थान पर दोबारा मस्जिद बनाने की अनुमति देने की मांग भी की गई है। फोरम का कहना है कि कानूनी दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
विधायक रफीक खान ने कहा कि पूरी कार्रवाई जानबूझकर की गई प्रतीत होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सिर्फ मस्जिद और मंदिर को ही निशाना बनाया गया।
वहीं विधायक अमीन कागजी ने कहा कि न्याय के लिए हर स्तर पर कोशिशें की गईं, लेकिन अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा गया था, लेकिन भेंट नहीं हो सकी और राज्यपाल से मिलने का अवसर भी नहीं मिला।
पर्याप्त समय न देने का आरोप
एपीसीआर के सआदत अली ने आरोप लगाया कि प्रभावित पक्ष को अदालत जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रशासन को पहले से पता था कि संबंधित पक्ष के पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने मस्जिद और मंदिर को सबसे अंत में नोटिस जारी किए जाने पर भी सवाल उठाए।
राजस्थान मुस्लिम फोरम ने कहा कि अगर सरकार ही इस तरह का रवैया अपनाएगी तो आम जनता किससे न्याय की उम्मीद करेगी। फोरम ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, न्यायिक प्रक्रिया का पालन और दोनों धार्मिक स्थलों के साथ हुई कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा की मांग दोहराई है।
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