सैलरी इंक्रीमेंट 2026: अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों ने बताया कितनी बढ़ेगी तनख्वाह

टीमलीज सर्विसेज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्तवर्ष में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का वेतन 8.6 फीसदी से 10.2 फीसदी तक बढ़ सकता है। ईवी, फिनटेक और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है।

होर्मुज संकट और ईरान युद्ध की वजह से भले ही फिलहाल कॉरपोरेट सेक्टर पर दबाव साफ दिखाई दे रहा हो, लेकिन वेतन वृद्धि के मोर्चे पर चालू वित्तवर्ष के आंकड़े उत्साहजनक रहने वाले हैं। जॉब्स पर नजर रखने वाली कंपनी टीमलीज सर्विसेज की हालिया रिपोर्ट बताती है कि इस साल प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह 10 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ सकती है।

इस सर्वे में कई अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों ने हिस्सा लिया और इनमें से ज्यादातर ने 2026-27 के दौरान ज्यादा इंक्रीमेंट देने की संभावना जताई है। रोजगार एवं वेतन परिदृश्य पर जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्तवर्ष में कर्मचारियों के वेतन में 8.6 फीसदी से 10.2 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। कुशल और बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की लगातार बढ़ती मांग इस वृद्धि की बड़ी वजह बताई जा रही है। टीमलीज का साफ कहना है कि कंपनियों को अधिक कुशल कर्मचारियों की जरूरत है और ऐसे कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी भी ज्यादा होगी।

किन सेक्टर में होगी सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान औसत वेतन वृद्धि 8.6 फीसदी से 10.2 फीसदी के दायरे में रह सकती है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ईवी अवसंरचना, वित्तीय-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और मेडिकल जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों की अहम भूमिका रहने वाली है।

ईवी और इससे जुड़े क्षेत्रों में 9.6 फीसदी से 10.2 फीसदी तक वेतन वृद्धि देखने को मिल सकती है। इनमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक और साइट इंजीनियर जैसी भूमिकाओं में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी का अनुमान है।

अब प्रदर्शन तय करेगा इंक्रीमेंट

टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए के मुताबिक, भारत का वेतन ढांचा पहले की तुलना में अब कहीं ज्यादा विविध और प्रदर्शन-आधारित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वेतन बढ़ोतरी के रुझान अब अलग-अलग क्षेत्रों की वृद्धि और विशेष कौशल पर निर्भर करने लगे हैं।

उनका यह भी कहना है कि वेतन वृद्धि अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि छोटे और उभरते शहर भी अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहे हैं।

ऑटो और बीमा सेक्टर भी आगे

रिपोर्ट के मुताबिक वाहन-बीमा और बीपीओ जैसे क्षेत्रों में इस साल वेतन वृद्धि 8.9 फीसदी से 9.5 फीसदी के बीच रह सकती है। वहीं बैंकिंग, निर्माण एवं रियल एस्टेट, दूरसंचार और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी 8.6 फीसदी से 8.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि विभिन्न कार्य क्षेत्रों में वेतन वृद्धि का सबसे ज्यादा असर बिक्री एवं विपणन, इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

किन शहरों में दिखेगा सबसे ज्यादा असर

शहरों के स्तर पर देखें तो चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद वेतन वृद्धि के मामले में सबसे आगे रह सकते हैं। इनके अलावा विशाखापट्टनम और नागपुर जैसे उभरते शहरों में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

इसके उलट सूरत, चंडीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में पिछले वर्ष की तुलना में वेतन वृद्धि की दर में हल्की गिरावट देखी जा रही है। हालांकि मेट्रो शहरों का हाल पहले की तरह टीयर-2 शहरों के मुकाबले बेहतर रहने की संभावना है।

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