हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अनुशासित, निडर और देश का जिम्मेदार नागरिक बने। जब अच्छे करियर के साथ-साथ देशभक्ति और नेतृत्व क्षमता की बात होती है, तो सबसे पहले सैनिक स्कूल का नाम सामने आता है। भारतीय रक्षा मंत्रालय की देखरेख में चलने वाले ये स्कूल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बचपन से ही बच्चों को एनडीए और सेना में अफसर बनने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करते हैं। यही कारण है कि हर साल लाखों अभिभावक अपने बच्चों को इन स्कूलों में भेजने का सपना संजोते हैं।
सैनिक स्कूल का अनुशासन जितना कड़ा होता है, यहां प्रवेश पाने के नियम भी उतने ही सख्त हैं। कई अभिभावक इस असमंजस में रहते हैं कि बच्चे का दाखिला किस उम्र और किस कक्षा में कराया जा सकता है, क्या हर साल या हर क्लास में एडमिशन होता है और क्या अब बेटियां भी इसका हिस्सा बन सकती हैं। अगर आप भी अपने बच्चे को सैनिक स्कूल सोसायटी से जोड़ना चाहते हैं, तो प्रवेश प्रक्रिया को ठीक से समझना जरूरी है।
किन कक्षाओं में मिलता है दाखिला?
सैनिक स्कूल में हर कक्षा में सीधी एंट्री नहीं मिलती। यहां प्रवेश के केवल दो मुख्य रास्ते हैं।
- कक्षा 6: यह दाखिले का सबसे पहला और सबसे लोकप्रिय पड़ाव है। अधिकांश बच्चे इसी कक्षा के जरिए सैनिक स्कूल के सिस्टम में प्रवेश करते हैं।
- कक्षा 9: यह दाखिले का दूसरा और आखिरी अवसर होता है। इसके बाद कक्षा 10, 11 या 12 में सीधे प्रवेश का कोई प्रावधान नहीं है।
उम्र को लेकर क्या हैं नियम?
दाखिले में सिर्फ कक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चे की उम्र भी अहम भूमिका निभाती है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियमों के अनुसार उम्र का मानदंड इस प्रकार है:
- कक्षा 6 के लिए: एडमिशन वाले साल (जैसे 31 मार्च तक) बच्चे की उम्र 10 से 12 साल के बीच होनी चाहिए।
- कक्षा 9 के लिए: प्रवेश के समय छात्र की उम्र 13 से 15 साल के बीच होना अनिवार्य है। साथ ही, बच्चे ने किसी मान्यता प्राप्त स्कूल से 8वीं कक्षा पास की हो या उसमें पढ़ रहा हो।
क्या बेटियां भी ले सकती हैं प्रवेश?
पहले सैनिक स्कूलों में केवल लड़कों को ही दाखिला मिलता था, लेकिन अब सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कक्षा 6 में लड़कियों को भी लड़कों की तरह ही प्रवेश मिलता है और वे भी देश सेवा के इस सफर का हिस्सा बन रही हैं। हालांकि, कक्षा 9 में लड़कियों के दाखिले के नियम कुछ चुनिंदा सैनिक स्कूलों में सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं, लेकिन कक्षा 6 के दरवाजे देश की हर बेटी के लिए खुले हुए हैं।
AISSEE से होता है चयन
सैनिक स्कूल में केवल फॉर्म भरकर या सिफारिश के आधार पर दाखिला नहीं मिलता। इसके लिए बच्चों को अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा पास करनी होती है, जिसे AISSEE (All India Sainik Schools Entrance Examination) कहा जाता है।
- कक्षा 6 की परीक्षा: इसमें ओएमआर शीट पर ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें मैथ्स, जीके, लैंग्वेज और इंटेलिजेंस (रीजनिंग) के टेस्ट शामिल होते हैं। यह पेपर कुल 300 अंकों का होता है।
- कक्षा 9 की परीक्षा: इसमें मैथ्स, इंग्लिश, इंटेलिजेंस, जनरल साइंस और सोशल स्टडीज से जुड़े सवाल आते हैं। यह पेपर थोड़ा एडवांस होता है और कुल 400 अंकों का होता है।
मेडिकल टेस्ट और मेरिट लिस्ट
लिखित परीक्षा पास करने के बाद बच्चों का मेडिकल टेस्ट और वेरिफिकेशन किया जाता है। इन दोनों चरणों को पार करने के बाद ही अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार होती है।
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