जौनपुर जिले के बहुचर्चित रवि यादव कथित फर्जी एनकाउंटर प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस कार्रवाई पर शुरू से ही उठ रहे सवालों के बीच यह मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग तक जा पहुंचा है। आयोग द्वारा जिलाधिकारी जौनपुर से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद कथित फर्जी मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग और मजबूत हुई है, जिससे पूरे प्रसंग पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
आयोग तक कैसे पहुंचा मामला
जानकारी के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग, लखनऊ में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रवि यादव की पुलिस मुठभेड़ को लेकर विभिन्न समाचार माध्यमों, सामाजिक संगठनों और मृतक के परिजनों की ओर से गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आयोग ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए जौनपुर के जिलाधिकारी से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
परिजनों के आरोप
शिकायत में परिजनों के उन आरोपों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें इस घटना को कथित फर्जी एनकाउंटर बताया गया है। परिजनों का कहना है कि रवि यादव को जीवित गिरफ्तार किया जा सकता था। इसके साथ ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जल्दबाजी किए जाने और परिवार को पर्याप्त अवसर न दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला
अधिवक्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 प्रत्येक व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई तथा जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसे में पुलिस मुठभेड़ जैसे मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विधिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
आयोग का आदेश
मामले पर विचार करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए जिलाधिकारी जौनपुर से टिप्पणी एवं जांच रिपोर्ट प्राप्त किया जाना उचित होगा। आयोग ने डीएम को निर्देश दिया है कि वे आवश्यक जांच कराकर अपनी रिपोर्ट 8 जुलाई 2026 तक आयोग को उपलब्ध कराएं। साथ ही आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रकरण को 9 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
अधिवक्ता की प्रतिक्रिया
अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने आयोग द्वारा मामले में संज्ञान लिए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के शासन में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर मामले के सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि जौनपुर के चर्चित ‘दूल्हा हत्याकांड’ में एक लाख रुपये के इनामी मुख्य आरोपी 28 वर्षीय रवि यादव को पुलिस ने 25 मई 2026 को खेतासराय थाना क्षेत्र के रानी की मोड़ के पास हुई एक कथित मुठभेड़ में मार गिराया था। रवि यादव पर आरोप था कि उसने 1 मई 2026 को सरायख्वाजा निवासी दूल्हे आजाद बिंद की बारात के दौरान गोली मारकर हत्या की थी। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रेम विवाह से नाराज थे और इसी वजह से इस वारदात को अंजाम दिया गया था।
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